
सरकारी आदेश को ठेेंगा दिखा रहे कई शिक्षक, जमे हुए है कार्यालयों में
प्रतापगढ़. सरकार ने व्यवस्था के नाम पर सालों से कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर चल रहे शिक्षकोंइस जुलाई में हटाकर वापस मूल स्कूलों के भेजने के आदेश दिए थे। लेकिन इस आदेश की प्रतापगढ़ में धज्जियां उड़ाई जा रही है। अब भी कई शिक्षक स्कूलों की बजाय प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर जमे हुए हैं। इधर स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो रही है। इस बीच ग्रामीणों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर स्कूलों में शिक्षक लगाने की मांग की है।
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव आर वैकटेंश्वरन ने गत जून में एक आदेश जारी कर कहा था कि कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर लगे शिक्षकों को अपने मूल स्कूल में लौटना होगा। ऐसा नहीं करने पर अगले माह का वेतन नहीं दिया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।
आदेश में यह भी कहा गया था कि य जिला कलक्टर, जिला परिषद, एसडीएम और अन्य कार्यालयों में शिक्षक और विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारी अपनी मूल जगह छोडकऱ लगे हुए हैं। इससे उनके मूल पद का काम प्रभावित होता है। विशेष तौर पर शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऊपर से कई शिक्षक प्रतिनियुक्ति परजिला मुख्यालयों के सरकारी कार्यालयों में गैरशैक्षणिक पदों पर लग जाते हैं। इस बारे में समय-समय पर मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल स्थान पर भेजने के आदेश किए गए हैं।
जिला कलक्टर को ग्रामीणों ने भेजी शिकायत
जिला मुख्यालय पर प्रारंम्भिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में महेश त्रिवेदी पिछले पदस्थापित है। इनका मूल पद स्थापन उच्च प्राथमिक विद्यालय धामलिया है। इसी प्रकार शिक्षक सुरेन्द्र पंवार आदि भी कार्यालय कार्य में लगे हैं। शिक्षक महेश त्रिवेदी और सुरेन्द्र पंवार को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलक्टर के नाम ज्ञापन भी दिया। इसमें कहा गया कि शिक्षक महेश शर्मा और सुरेन्द्र पंवार धामलिया को प्रतापगढ़ लगा रखा है, जबकि स्कूल में शिक्षकों की कमी है। इसलिए इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति रद्द कर इन्हें वापस स्कूल में लगाया जाए ताकि स्कूल मेें शिक्षण व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
शिक्षण व्यवस्था के अतिरिक्त नहीं हो प्रतिनियुक्ति
आदेश में कहा गया था कि शिक्षण व्यवस्था के लिए कार्यव्यवस्था होने वाली प्रतिनियुक्तिओं के अन्य कार्यों के लिए की गई प्रतिनियुक्ति निरस्त की जाती है ओर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्र्याे से मुक्त कर उन्हें मूल विद्यालय मेें भेजें। यदि ऐसे शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया जाता है तो जुलाई माह में उन्हें वेतन नही दिया जाएगा।
क्या कहता है नियम
नि:शुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 के अनुसार जनगणना, आपदा प्रबंधन और चुनाव कार्यांे में ही शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा सकती है। यह काम पूरा होने के बाद उन्हें फिर से अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटना होगा। लेकिन देखा यह जाता है कि एक बार कार्यालय में ड्यूटी लगवाने के बाद न तो शिक्षक स्कूल में जाने में रुचि दिखाता और न ही अधिकारी उसे वापस स्कूल भेजता।
एक शिक्षक को भेज दिया
शिक्षक सुरेन्द्र पंवार को वापस स्कूल में भेज दिया है। दूसरे शिक्षक महेश त्रिवेदी को भी एक सप्ताह में प्रतिनियुक्ति खत्म कर वापस स्कूल भेज देंगे।
- मावजी खांट, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक, प्रतापगढ़
Published on:
24 Jul 2019 11:21 am
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