
प्रतापगढ़ के लाभार्थियों ने लिया जनसंवाद में भाग
331 कर्मचारी और वॉलंटियर भी गए साथ
प्रतापगढ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जयपुर में आयोजित लाभार्थी जनसंवाद कार्यक्रम में प्रतापगढ़ जिले से 3905 लाभार्थी पहुंचे।जहां कार्यक्रम में भाग लिया।प्रतापगढ़ जिले से 86 बसों में लाभार्थीऔर वॉलेंटियर सुबह पहुंचे। जहां दुदु के पास सभी को ठहराया गया। यहां से सुबह दस बजे से सभी बसों को रवाना किया। जो जयपुर पहुंची।यहां से अमरुदों के बाग कार्यक्रम स्थल पर सभी लाभार्थी पहुंचे।
नियंत्रण कक्ष स्थापित
जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष मिनी सचिवालय में स्थापित किया गया है। जिसके दूरभाष संख्या 01478 -222333 है।इसके प्रभारी उपखण्ड अधिकारी प्रतापगढ़ है। जिला कलक्टर भंवरलाल मेहरा ने बताया कि नियंत्रण कक्ष रविवार तक तीन पारियों में कार्यरत रहेगा।
बसें नहीं होने से परेशानी
जिले से 86 बसें जयपुर में गई है। ऐसे में शहर मुख्यालय से गांवों और कस्बों तक जाने में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सरकारी धन का दुरुपयोग का आरोप
प्रतापगढ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली और जनसंवाद में सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप कांग्रेस ने लगाया है।जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रविप्रकाश ओझा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।जिसमें बताया गया कि भाजपा सरकारें एक भी जनकल्याणकारी योजना बनाने में और धरातल पर उतराने में असफल साबित हुई है।जबकि गत कांग्रेस सरकार ने कई योजनाएं बनाई है। सही मॉनिटरिंग के चलते धरातल पर सही साबित हुई है। आज के आयोजन में प्रदेश भर से लोगों को जबरन एकत्रित किया गया है। जो राजधानी में दिखावा मात्र किया गया है।
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कांठल के कई मदरसों में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं
प्रतापगढ़. अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को बेहतर दुनियावी तालिम हासिल हो इसके लिए राज्य एवं केन्द्र सरकार की ओर से मदरसों का पंजीयन कर सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके लिए अलग से अल्पसंख्यक मामलात विभाग गठन कर बेहतर से बेहतर सुविधाएं मुहैया हो इसके लिए कई जतन किए जा रहे हंै। लेकिन जिले में जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और विभागीय उदासीनता के चलते जिले के मदरसों की हालत दयनीय है। जिले में तकरीबन 26 मदरसे पंजीबद्ध हैं। जिसमें से 24 संचालित हैं जबकि दो बंद हैं। लेकिन उनके हालात बद से बदतर हैं। जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों के साथ ही मदरसा कमेटी की उदासीन रवैये के चलते मदरसों में अध्ययनरत बच्चों को न तो दिनी और न ही दुनियावी तालिम मुक्कल तरीके से हासिल हो पा रही है।
जिले में संचालित मदरसों की स्थिति का आंकलन किया जाए तो जिला मुख्यालय की कच्ची बस्ती स्थित मदरसा मेहताबिया की हालत बद से बदतर है। यहां मदरसे को न तो छत नसीब है और न ही अध्यापक। जबकि 2012 में यहां दो पैराटीचर्स लगाए गए थे जो पहले दिन की नियुक्ति के बाद से आज तक मदरसे में नहीं पहुंचे हंै।
खुले मेें खिलाते पोषाहार
कई मदरसे ऐसे हैं जिनको छत भी नसीब नहीं है। ऐसे में इनमें खुले मेें पढ़ाई और खुले में ही पोषाहार बनाया जाता है। ऐसी कई अव्यवस्थाएं हैं। जिनको देखते हुए इन मदरसों को एक अदद मददगार की दरकार है।
पढ़ाई नहीं पोषाहार
ही मिलता है
मदरसे में पढ़ाई की जगह केवल पोषाहार के लिए बच्चे मदरसे आते हैं। जबकि सत्र 2017-18 में यहां कक्षा 1 से 5 तक तकरीबन 45 बच्चे अध्ययनरत थे। जबकि इस सत्र में अधिकांश बच्चे अध्यापक नहीं होने से अन्य विद्यालयों में प्रवेश लेने पर विवश हुए।
रसोइये के भरोसे मदरसा
जिला मुख्यालय के कच्ची बस्ती स्थित मदरसा मेहताबिया अध्यापक के अभाव में रसोइए की देखरेख में संचालित हो रहा है। यहां मदरसा कमेटी की ओर से नियुक्त अध्यापिका विगत दो वर्षों से अपनी सेवा प्रदान कर रही थी। इस सत्र से अपनी सेवाएं देना बंद कर दिया है । अब यह मदरसा रसोइये के भरोसे संचालित हो रहा है।
विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते जिले के मदरसों की स्थिति खराब है। कई मदरसों में अध्यापक नियुक्त करने की जिम्मेदारी तो विभाग की होती है। पर कोई सुनवाई नहीं होती है।
मकसूद खान मेव, उपाध्यक्ष अंजुमन फुरकानियां कमेटी, जिला प्रतापगढ़
&मैंने जब से जिला संयोजक बना हूं तब से मदरसों की स्थिति सुधारने का प्रयास कर रहा हंू। जिन मदरसों में भवन व अध्यापक नहीं है उनके लिए प्रयास कर रहे है।
हाजी शेख जाहिद हुसैैन, जिला संयोजक, मदरसा कमेटी, जिला प्रतापगढ़
Published on:
08 Jul 2018 11:02 am
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