यहां हर मौसम में भुट्टे
यहां हर मौसम में भुट्टे
मधुरातालाब. ये दृश्य हैं लहलहाते हरे भरे खेतों का। आज भी यहां के किसान हर मौसम में भुट्टों का उत्पादन करते है।
अमुमन मक्का की फसल मानसून की बारिश के साथ जून-जुलाई माह में बोई जाती है।
सितम्बर-अक्टूबर माह में फसल तैयार होती हैं। यहां के किसान भी अब शिक्षा के विकास के साथ साथ आधुनिक तरीके से फसल तैयार कर रहे है। लीलाबाई मीणा ने बताया कि यह मक्का की फसल बड़े शहरों में भेजी जाती है।यहां हर साल में मक्का की दो बार ली जाती है।
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सर्दी की विदाई, गर्मी की दस्तक
-सूरज के तेवर होते जा रहे तीखे
प्रतापगढ़. जिले में इन दिनों सर्दी की विदाई हो रही है तो गर्मी दस्तक दे रही है। सूर्य के तेवर तीखे होने लगे हैं जिसके चलते तापमान में बढ़ोतरी होने से गर्मी का अहसास बढ़ता जा रहा है। जिले में पिछले कुछ दिनों से तापमापी का पारा अधिकतम 35 और न्यूनतम 18 डिग्री के आसपास चल रहा है।
अब उतरे गर्म कपड़े
गर्मी के चलते लोगों के शरीर से गर्म कपड़े उतर गए हैं। कुछ समय पहले तक कभी सर्दी तो कभी गर्मी से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गर्मी की दस्तक के साथ ही सुबह शाम व रात को सर्दी का अहसास बने रहने के कारण गर्म कपड़ों से निजात नहीं मिल पा रही थी। लेकिन गर्मी का जोर बढऩे के साथ ही अब गर्म कपड़ों से निजात मिल गई है।
चलने लगे पंखे
गर्मी का अहसास बढऩे के साथ ही लोग इससे निजात पाने के जतन करने में जुट गए हैं। घरों व दुकानों में पंखे चलना शुरू हो गए हैं वहीं दोपहर में गर्मी बढऩे के साथ इनकी रफ्तार तेज हो जाती है।
बदला जायका
गर्मी शुरू होने के साथ ही लोगों का जायका बदलने लगा है। लोगों को शीतल पेय पदार्थ व आइस्क्रीम आदि भाने लगे हैं जिसके चलते इनकी बढ़ती मांग को देखते हुए शहर के विभिन्न स्थानों पर शीतल पेय आदि की कई दुकानें खुल गई हैं। जहां बड़ी संख्या में लोगों को शीतल पेय, आइस्क्रीम आदि का लुत्फ उठाते हुए देखा जा सकता है।
खरीदारी बढ़ी
गर्मी को देखते हुए बाजार में पंखे-कूलर, फ्रिज, एसी आदि की मांग बढ़ गई है। इलेक्ट्रोनिक उत्पादों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। दुकानों में ग्राहकों की मांग के मुताबिक विभिन्न उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
जाती सर्दी का भी कुछ डर
जिले में गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है, लेकिन फिर भी लोगों में जाती सर्दी की चपेट में आने का डर बना हुआ है। जिसके चलते घरों में पंखे चलने के बावजूद अब भी हल्की रजाई आदि का सहारा लिया जा रहा है। वहीं बच्चों के मामले में विशेष सावधानी बरती जा रही है।
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