प्रतापगढ़. जिले के निकटवर्ती बांसवाड़ा और डूंगरपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाले सिंदूरी के पौधों को कांठल के वातावरण में बढ़वार की संभावना है। इसी को देखते हुए वन विभाग की ओर से गत पांच वर्षों में यहां भी ङ्क्षसदुरी के पौधे तैयार किए जा रहे है। जिले के धरियावद नर्सरी में गत वर्षों में पौधे तैयार किए है। इसमें इस वर्ष भी पांच हजार पौधे तैयार कर वितरित किए जा रहे है। गौरतलब है कि कांठल की सम जलवायु के कारण विभिन्न प्रजातियों के औषधीय महत्व के कई पेड़-पौधों की प्रजातियां जंगल में पाई जाती है। वहीं निकटवर्ती जिला क्षेत्रों की प्रजातियों के लिए भी वातावरण उपयुक्त है। इसे देखते हुए वन विभाग ने पहले वर्ष में बांसवाड़ा जिले से लगते हुए पीपलखूंट नर्सरी में सिंदूरी के पौधे तैयार किए थे। इन पौधों को जंगल में लगाया गया था। जबकि कई पौधों को बगीचों में लगाने के लिए वितरित भी किए गए थे। सभी स्थानों पर अच्छी अवस्था मेंं पौधे चल रहे है। ऐेसे में धरियावद में भी तीन वर्षों से पौधे तैयार किए जा रहे है।
पांच वर्ष पहले से ही कर दी थी शुरुआत
वन विभाग की ओर से पांच वर्ष पहले ङ्क्षसदुरी के पौधे तैयार करने की शुरुआत की गई थी। जिसमें प्रथम वर्ष में दो हजार पौधे तैयार कर जंगलों में लगाए गए थे। जो अब बड़े हो चुके है। कुछ पौधों को सुरक्षित स्थानों पर लगाने के लिए भी वितरित किए गए। सभी पौधे अच्छी अवस्था में चल रहे है। ऐेसे में यहां का वातावरण उपयुक्त है। ङ्क्षसदूरी जिसका वैज्ञानिक नाम बिक्सा ओरेलाना हैं।
जिले में पौधरोपण का कार्य जारी
प्रतापगढ़ जिले में इन दिनों पौधरोपण का कार्य जारी है। वन विभाग की ओर से वितरित किए जाने के लिए कुल साढ़े सात हजार पौधे तैयार किए थे। जो अभी वितरित किए जा रहे है। इन पौधों को विभिन्न विभागों, संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं को वितरित किए जा रहे है। इसके साथ ही विभाग की ओर से जंगल में पौधे लगाने का कार्य पूर्ण हो चुका है।
ङ्क्षहदू संस्कृति में काफी महत्व
ङ्क्षसदूर का ङ्क्षहदू संस्कृति में काफी महत्व है। महिलाएं मांग में ङ्क्षसदूर भरती है। जबकि हनुमानजी और गणेशजी को भी ङ्क्षसदूर ही चढ़ाया जाता है। इसके अलावा ङ्क्षसदूर का उपयोग कई बीमारियों में भी किया जाता है। इस पौधे से निकलने वाले बीजों से असली ङ्क्षसदूर और रोली बनती है। यह झाड़ीनुमा पौधा होता है। जो नम जलवायु में अच्छा पनपता है। इसके बीजों से ङ्क्षसदूर निकलता है।
कई पौधों के लिए उपयुक्त है कांठल का वातावरण
जिले का वातावरण कई पौधों के लिए उपयुक्त है। ऐसे में ङ्क्षसदूर के पौधे भी तैयार किए गए है। जो काफी उपयुक्त है। गत पांच वर्षों से वन विभाग की ओर से पौधे तैयार कर वितरित किए जा रहे है। इनमें से कई औषधीय महत्व वाले पौधे भी है। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए नर्सरियों में पौधे तैयार किए हैं। जिसमें ङ्क्षसदूर के पौधे भी तैयार किए गए है।
– हरिकिशन सारस्वत, उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़