
pratapgarh farmer कांठल में गहराया भूसे का संकट
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प्रतापगढ़. जिले में इस वर्ष भूसे का संकट गहरा गया है। गेहूं, मसूर, चना की फसलों की थ्रेसरिंग हार्वेस्टर से किए जाने से भूसा नहीं मिल पाता है। ऐसे में इस वर्ष भूसे का संकट गहरा गया है। अतिवृष्टि के कारण सोयाबीन का भूसा भी बहुत मिला था। ऐसे में हालात यह है भूसे के दाम गत वर्ष से दोगुना हो गए है। जिले में गत वर्ष डेढ़ से दो हजार रुपए प्रति ट्रॉली का भाव था। जो इस वर्ष चार हजार रुपए प्रति ट्रॉली हो गया है।
जिले में एक तरफ तो पशुपालन बढ़ता जा रहा है। वहीं इस वर्ष भूसे का संकट होता जा रहा है। जिससे पशुपालकों में भी चिंता बढ़ गई है। भूसा कम होने के कई कारण सामने आए है। जिसमें गेहूं की कटाई हार्वेस्टर से किए जाना प्रमुख है। इसमें गेहूं और भूसा निकलता है। जिसमें भूसा खेतों में ही बिखर जाता हैै। इसके अलावा इस वर्ष रबी में तिलहनी फसलों की बुवाई भी की गई थी। जिससे भी मवेशियों के खाने के लिए भूसा नहीं मिल पाया। जबकि इस वर्ष जिले से बाहर भी काफी मात्रा में भूसा ले जाया गया है। जिले में कई इलाकों से अब भी भूसा बाहर ले जाया जा रहा है। ऐसे में किसानों ने मांग की है कि भूसे को बाहर ले जाने पर रोक लगाई जाए।
नहीं खाते है तिलहनी फसलों का भूसा
जिले में रबी में तिलहनी फसलों की बुवाई अधिक होनेे से भी यह समस्या सामने आर्ई है। तिलहनी फसलों का भूसा मवेशियों के खाने लायक नहीं होता है। सरसों, अलसी और अन्य औषधीय फसलों का भूसा मवेशी नहीं खाते है।
परम्परागत फसलों की बुवाई से मिल सकती है निजात
जिले में परम्परागत फसलों की बुवाई का रकबा कम होने लगा है। जबकि परम्परागत फसलों में गेहूं, चना, मसूर का ही भूसा मवेशियों के खाने लायक होता है। ऐसे में किसानों को भूसे की समस्या से निजात के लिए इन फसलों की बुवाई पर ध्यान देना होगा।
अलग-अलग है भाव
जिले में इन दिनों भूसे का भाव अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग है। इसमें भी गेहूं, मसूर और चना का भाव अधिक है। जबकि मैथी के भूसे का भाव कम है। लेकिन कई इलाकों में यह भूसा भी अब नहीं मिल रहा है। इस आधार पर अलग-अलग इलाकों में भाव भी अलग-अलग है।
खरीफ की फसल खराब होने से नहीं रहा सोयाबीन
इस वर्ष भूसे की कमी का प्रमुख कारण खरीफ की फसल खराब होना भी है। सोयाबीन और मक्का की फसल खराब हो गर्ई थी। ऐेसे में मवेशियों के खाने के लिए भूसा बहुत कम निकला था। इससे अभी यह समस्या हो गई है।
बाहर जा रहा भूसा
मोखमपुरा. गत दिनों से जिले से रबी फसल की थ्रेसङ्क्षरग के साथ ही भूसे के भाव बढ़ गए। ऐसे में अधिकांश किसानों ने अपने खेत-खलिहानों औैर बाड़े में भूसे का संग्रहण किया है। जबकि कई किसानों की ओर से भूसा बेचा गया है। ऐसे में यहां से ट्रक, पिकअप आदि में भरकर बाहर ले जाया जा रहा है।
अरनोद. इलाके में इन दिनों भूसे की कमी हो गई है। जिससे पशुपालकों को अभी से खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालकों ने बताया कि इस वर्ष भूसे की समस्या होने लगी है।
परम्परागत फसलों की बुवार्ई आवश्यक
किसानों को चाहिए कि वे व्यवसायिक फसलों के साथ पारम्परिक फसलों की भी बुवाई करे। जिससे खेतों में फसल चक्र भी बना रहे। वहीं मवेशियों के लिए भूसे की समस्या भी नहीं हो।
गोपालनाथ योगी, सहायक निदेशक, कृषि विस्तार, प्रतापगढ़.
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Published on:
16 Apr 2022 07:54 am
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