गर्मी में आग से धधक रहे जंगल


प्रतापगढ़. जिले में इन दिनों गर्मी बढऩे के साथ ही जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई है। जिले में रोजाना कहीं ना कहीं आग लग रही है। जिले के धोलापानी क्षेत्र में सियाखेड़ी वन क्षेत्र के बिलिया तालाब जंगल में आग लग गई।

By: Devishankar Suthar

Published: 03 Apr 2021, 07:25 AM IST


प्रतापगढ़. जिले में इन दिनों गर्मी बढऩे के साथ ही जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई है। जिले में रोजाना कहीं ना कहीं आग लग रही है। जिले के धोलापानी क्षेत्र में सियाखेड़ी वन क्षेत्र के बिलिया तालाब जंगल में आग लग गई। सियाखेड़ी वनपाल त्रिलोकनाथ ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को सियाखेड़ी वन क्षेत्र के बिल्लियांतालाब जंगल में अचानक आग लग गई। हवा की गति तेज होने से आग काफी फैल चुकी थी। सूचना पर जिला मुख्यालय से दमकल पहुंची। चालक कैलाश चंद जटिया,फायरमैन शोभाराम,संग्राम मीणा आदि मौके पर पहुंचे। साथ ही वन विभाग से अनिल मीणा कल्याण सिंह,सोनु जाटव,सुरेश मीणा सहित ग्रामीण कमलेश मीणा, भेरूलाल मीणा, मोहन लाल मीणा पंकज टॉक आदि कर्मचारियों एवं ग्रामीणों ने तीन घंटे से अधिक समय पर आग पर काबू पाया।
हीरावास और दांतला मगरा वनखण्ड में लगी आग
-तेज हवा के कारण आग पर नहीं पाया जा सका काबू
पारसोला. कस्बे के नरवाली मार्ग पर चरपोटिया, चूना भाटी से लगे करणेश्वर में शुक्रवार सुबह अचानक आग लग गई। तेज हवा चलने से आग ने विकराल रूप ले लिया। आग हीरावास एवं दातंला मगरा वनखण्ड के सेवानगर, अणत, तलाईया, मोखमपुरा ओर जाम्बुडी के जंगल तक पहुंच गई। आग की सूचना पर मुंगाणा वनपाल शंकरसिंह पारसोला वनपाल दिलीपराजसिंह चौहान, कमलाशंकर, लक्ष्मणलाल सहित कई वनकर्मी पहुंचे और आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लेकिन आग बढती गई।
गौरतलब है कि तेंदूपत्ता की फुटान के लिए सूखे पतों का जलाया जाता है। जिससे अधिक से अधिक पत्तों का फुटान हो सके। कई लोग अंधविश्वास के चलते भी जंगल में आग लगाते है। पारसोला से जिला मुख्यालय की दूरी ६५ किलोमीटर है। पारसोला एंव धरियावद उपखण्ड में कई घने जंगल होने के साथ सीतामाता अभयारण लगा हुआ है। लेकिन यहां दमकल की कोई व्यवस्था तक नहीं है।

चिलचिलाती धूप में कार्य करने को मजबूर है नरेगाकर्मी
रठांजना. क्षेत्र में एक तरफ तो गर्मी बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर नरेगा का समय परिवर्तन नहीं किया गया है। ऐसे में मजदूर भी चिलचिलाती धूप में कार्य करने को मजबूर है। जिससे नरेगा मजदूरों ने समय परिवर्तन की मांग की है। यहां गांव में चल रहे कार्य पर धूप में मजदूरों के लिए छाया तक की व्यवस्था नहीं है। जिसे देखते हुए श्रमिकों ने कार्य के समय में बदलाव की मांग की है।

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