
राजकुमार पाल
प्रतापगढ़. यूपी की प्रतापगढ़ सदर सीट से अपना दल (एस) के राजकुमार पाल के विधायक बनने के बाद उनकी जीत की चर्चा की जा रही है । मगर राजकुमार पाल के लिये राजनीति में आना और आकर सफल होना इतना आसान भी नहीं था । राजकुमार पाल को कभी अपना पेट भरने के लिये ऑटो और टैक्सी भी चलानी पड़ी थी ।
प्रतापगढ़ शहर से सटे पूरे केशवराय गांव निवासी राजकुमार पाल का जन्म 1963 में हुआ था । राजकुमार पाल के पिता मिल में काम करते थे । 1983 में स्नातक की पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ चुनाव में भी उतरे, मगर हार का सामना करना पड़ा । घर की माली हालत ठीक नहीं थी तो स्नातक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई छोड़कर कमाने मुंबई चले गये, जहां उन्होंने ऑटो और टैक्सी चलाई । ऑटो और टैक्सी चलाने में मन नहीं लगा तो वापस यूपी आ गये और 1993 में सपा नेता रामलखन यादव के संपर्क में आये । सामाजिक रूप से सक्रिय रहने वाले राजकुमार पाल धीरे- धीरे राजनीति में जड़ें जमानी शुरू कर दी। 1995 में पंचायत चुनाव में उनकी पत्नी राजकुमारी 245 वोटों से प्रधान चुनीं गईं । 2000 में सामान्य सीट होने पर राजकुमार पाल जीतकर प्रधान बने। पांच साल बाद यानी 2005 में इनकी पत्नी प्रधान निर्वाचित हुईं। 2010 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसी बीच राजकुमार पाल बीजेपी से जुड़ गये और पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रियता से लगे रहे । 2015 में एक बार फिर इनकी पत्नी प्रधान बन गई । पार्टी में इनकी सक्रियता को देखते हुए 2016 में उन्हें भाजपा जिलामंत्री का पद दिया गया । 2017 विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव में उनकी मेहनत का उन्हें इनाम मिला और 2019 में प्रतापगढ़ सदर सीट से अपना दल के टिकट से वह प्रत्याशी बने और जीत हासिल की।
2019 में राजकुमार पाल की पत्नी का निधन हो गया, जिसके बाद इस सीट पर उनकी छोटी बेटी प्रियंका को लोगों ने निर्विरोध चुन लिया । उनकी बड़ी बेटी ज्योति पाल सीआरपीएफ में है ।
वोटों के अंतर के हिसाब से बड़ी जीत
राजकुमार पाल ने करीब 29 हजार वोटों से जीत हासिल की है । वोटों के अंतर के हिसाब से राजकुमार पाल की जीत बड़ी है । राजकुमार पाल ने संगमलाल गुप्ता के रिकार्ड को तोड़ दिया है। राजकुमार की जीत का अंतर 55.18 प्रतिशत है, जबकि संगमलाल गुप्ता ने 42.75 प्रतिशत मतों से जीत हासिल की थी।
Published on:
25 Oct 2019 05:44 pm
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