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टीचर भर्ती के 685000 सफल अभ्यर्थियों के लिये बड़ी खबर, सरकार के इस नियम का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट 8 अप्रैल को करेगी सुनवाई। टीचरों की नियुक्ति में निवास की अनिवार्यता पर उठा सवाल।

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में सफल अभ्यर्थियों को आवेदन से पिछले 5 साल तक प्रदेश में निवास की अनिवार्यता की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है और सुनवाई हेतु 8 अप्रैल को केस पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने मनीष व् वंदना निवासी हरियाणा व् नई दिल्ली की याचिका पर दिया है।

याची के अधिवक्ता का कहना है कि 9 जनवरी 18 को सहायक अध्यापकों की भर्ती का विज्ञापन हुआ और 13 अगस्त 18 को घोषित परिणाम में 41हजार 556 अभ्यर्थी सफल हुए । याची भी सूची में शामिल है। 18 अगस्त 18 को शासनादेश से गाइडलाइन जारी की गयी कि विज्ञापन से पहले आवेदक 5 साल तक प्रदेश में निवास कर रहा होना चाहिए । याचियों को काउंसिलिंग के लिए नही बुलाया गया तो याचिका दाखिल कर चुनौती दी गयी है। याची अधिवक्ता का तर्क है कि अनुच्छेद 16(3) के तहत केंद्र सरकार को संसद के जरिये अर्हता मानक तय करने का अधिकार है। राज्य को ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

संविधान का अनुच्छेद 13 (2) कहता है कि संविधान के विपरीत बना कानून शून्य होगा। साथ ही 1981 की बेसिक शिक्षक सेवा नियमावली में भी ऐसी व्यवस्था नही है जिससे निवास के आधार पर चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति से रोक दिया जाय। और भर्ती विज्ञापन में भी निवास की अनिवार्यता की व्यवस्था नही है तो बाद में भर्ती नियमो में बदलाव विधि विरुद्ध है। कोर्ट ने निवास के आधार पर महिला आरक्षण को रद्द कर दिया है। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों को दूसरे प्रदेश का निवासी होने के आधार पर नियुक्ति देने से इंकार नही किया जा सकता। याचिका की सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।

By Court Correspondence