
Acharya Kush mani
इलाहाबाद. प्रयाग में आगामी कुंभ से पहले मेला क्षेत्र में कुंभ में जमीन आवंटन के लिये संतों ने पैरोकारी शुरू कर दी है। कुभ मेले में जमीनों के आवंटन में स्थानीय अखाड़ों मठों सहित बाहर से आने वाली संस्थाओं और कल्पवासी मंदिरों से आने वाले श्रद्धालु स्थानीय प्रशासन के सम्पर्क में है। इसी क्रम में धर्माचार्य मंच के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य कुश मुनि ने कुंभ मेला अधिकारी को एक पत्र देकर मांग की है कि कुंभ मेला के अभिलेख में जो भी अखाड़े दर्ज हैं उनको जमीन और सुविधा उनके नाम से दी जाए। जिस पर मेला अधिकारी इस बात का आश्वासन दिया गया है कि सभी अखाड़ों को जो कुंभ मेला अभिलेख में दर्ज हैं उनके नाम से भूमि और सुविधा दी जाएगी।
बता दें कि कुम्भ में आने वाले बहुत से ऐसे संत महंत होते है जो मात्र कुभ में ही प्रयाग आते है। ऐसे में हर साल आने वाले आखाड़े कल्पवासी संस्थाए समाजसेवी संस्थाओं की जमींन काटी जाती है और सभी को जमीन दी जाती है। लेकिन इस बार कुंभ से पहले लगातार अखाड़ा परिषद द्वारा संतो के फर्जी होने की लिस्ट जारी कर माहौल गर्म कर दिया है। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद को पत्र देकर निवेदन किया कि आवाह्न अखाड़ा एवं पंच अग्नी अखाड़ा की जमीन और सुविधा जूना अखाड़ा को और आनंद अखाड़ा की जमीन और सुविधा निरंजनी अखाड़ा को तथा अटल अखाड़ा की जमीन और सुविधा महानिर्वाणी अखाड़ा को दर्ज अभिलेख के अनुसार ही जमीन दी जाए किसी को अतिरिक्त सुविधा नदी जाए । अभिलेख में जो भी अखाड़े दर्ज हैं उनको जमीन और सुविधा उनके नाम से ही दी जाये।
कुंभ मेला अधिकारी ने आश्वासन दिया कि सभी अखाड़ों को जो कुंभ मेला अभिलेख में दर्ज हैं उन्हीं के नाम से भूमि और सुविधा दी जायेगी। महंत ने कहा कि यदि कुंभ मेला अधिकारी अपने आश्वासन को पूर्ण करते हैं तो आवाह्न अखाडाए पंच अग्नी अखाड़ाए अटल अखाड़ा और आनंद अखाड़ा के साथ न्याय हो सकेगा और जूना अखाड़ा और निरंजनी अखाड़ा के दबाव में कुंभ मेला अधिकारी किसी के साथ अन्याय न करें नही तो अखिल भारतीय संयुक्त धर्माचार्य मंच जनांदोलन करने के लिये बाध्य होगा।
आचार्य कुशमुनि ने कहा कि अखिल भारतीय संयुक्त धर्माचार्य मंच अखाड़ों का नहीं बल्कि तथाकथित अखाड़ा परिषद का विरोधी है और यह सत्य है कि यह कोई परिषद नहीं बल्कि गैंग है। जिसमें केवल नरेन्द्र गिरी का हुक्म चलता है। सारे फैसले नरेन्द्र गिरी और उसके बाद कुछ मामलों मे हरी गिरी से पूंछ भले लिया जाता हो, पर सिक्का तो इस परिषद में नरेन्द्र गिरी का ही चलता है। इसलिए अफसर लोग भी केवल नरेन्द्र गिरी की परिक्रमा करते हैं, बाकी किसी को भाव नहीं देते।
BY- Prasoon Pandey
Published on:
23 Mar 2018 01:19 pm
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