24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘संगम में स्नान करने के लिए पालकी से जानें की क्या थी चुल्ल?’…स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद VS आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती

Swami Avimukteshwarananda VS Acharya Jitendrananda Saraswati : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती के बीच एक टीवी शो पर बहस हुई। आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि माघ मेले में शाही स्नान की कोई परंपरा ही नहीं है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

प्रयागराज

•

image

Avaneesh Kumar Mishra

•

Updated: 23 Jan 2026, 4:47 PM IST

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती के बीच हुई बहस, PC- Patrika

प्रयागराज : प्रयागराज में मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। संत समाज दो धड़ों में बंट चुका है। एक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में है तो दूसरा प्रशासन और सरकार के नियमों से सहमत है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती के बीच एक टीवी शो पर बहस हुई। इस दौरान आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि, 'माघ मेले में शाही स्नान की परंपरा नहीं है। शाही स्नान की परंपरा सिर्फ महाकुंभ के दौरान रहती है। उस दौरान भी जो अखाड़ों के संत रथ या पालकी से शाही स्नान के लिए जाते हैं उनके रथ भी संगम से कुछ दूर पहले D जोन में रोक दिए जाते हैं। फिर इनको (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) क्या चुल्ल थी कि इन्हें संगम तक पालकी से जाना था?'

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर सवाल क्यों?

अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि, 'उनके गुरु और प्रतिपक्षी स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का पहले से विवाद चल रहा था। गुरु के शरीर छोड़ने के बाद उनका पट्टाभिषेक किया गया। प्रतिपक्षी स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें शंकराचार्य के रूप में कार्य करने से रोकने की मांग की थी।

यह मामला 21 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में सुना गया, जहां अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि इसके बाद उन्होंने 12 अक्टूबर को पुरी के शंकराचार्य से जुड़ा एक कथित छद्म हलफनामा अदालत में पेश किया, जिसमें कहा गया कि पुरी पीठ ने उन्हें मान्यता नहीं दी है और भविष्य में किसी अन्य का पट्टाभिषेक न कराया जाए। इसी आधार पर अदालत ने एक आदेश पारित किया, जिसे अब संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है।

पार्टियों के संपर्क में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर विरोधी पार्टियों के संपर्क में रहने का आरोप लगता है। वह केंद्र और योगी सरकार पर लगातार निशाना साधते रहते हैं। शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भी विवादास्पद टिप्पणी की. उनका कहना था कि जो लोग अंग्रेजी तारीखों पर अपना जन्मदिन मनाते हैं, वे हिंदू नहीं हो सकते। गौ हत्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने नरेंद्र मोदी को घेरा था।

पालकी में ही क्यों जाना? पैदल जा सकते थे

आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम तक पालकी में ही क्यों जाना था। जब मेला प्रशासन ने उनसे अपील की थी तो वह पालकी से उतरकर स्नान करने के लिए क्यों नहीं गए। क्या वह 50-60 मीटर पैदल नहीं चल सकते?

पुलिस ने बटुकों को क्यों मारा?

इस सवाल पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बात पालकी या पैदल जाने की नहीं थी। बात थी व्यवहार की…प्रशासन ने उनके साथ बहुत ही गलत व्यवहार किया। इससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन का बर्ताव इस तरीके का नहीं होना चाहिए था। पुलिस ने हमारे बाल बटुकों क्यों मारा-पीटा और घसीटा?

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग