
केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से किया आग्रह, PC- Patrika
प्रयागराज : माघ मेला–2026 के दौरान मौनी अमावस्या पर पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब सियासी रंग लेने लगा है। एक ओर जहां प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है, वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
प्रयागराज में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा,
'पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। वह अच्छे से स्नान करें। उनसे प्रार्थना है कि इस विषय का यहीं समापन करें।'
शंकराचार्य के पालकी में संगम स्नान के ऐलान के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस जारी किया। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया कि वह स्वयं को शंकराचार्य किस आधार पर लिख रहे हैं और उनके शिविर पर लगे बोर्ड में ‘शंकराचार्य’ कैसे अंकित है। प्राधिकरण ने इस पर 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया।
मंगलवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वह इस नोटिस का जवाब देंगे। बुधवार को उन्होंने अपना जवाब दाखिल कर दिया।
शंकराचार्य की ओर से उनके अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र के माध्यम से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने की मांग की गई है। जवाब में कहा गया है कि शंकराचार्य का पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाद में आया है।
साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के आरोप में अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी और अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
आठ पेज के जवाब में प्रशासन द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की गई है। हालांकि इसके बावजूद मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को एक और नोटिस जारी कर 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त कर हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध क्यों न लगा दिया जाए।
दूसरे नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि 'हमें किस आधार पर जमीन और सुविधाएं दी गई थीं और अब किस आधार पर उन्हें वापस लिया जा रहा है?' इस बयान के साथ ही शंकराचार्य और प्रशासन के बीच टकराव और तेज हो गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है और यह मामला अदालत तक पहुंचता है या नहीं।
Published on:
22 Jan 2026 09:29 pm
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