
इलाहाबाद उच्च न्यायालय
इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वर्णजयन्ती पुरम गाजियाबाद में प्लाट आवंटन में 3.68 करोड़ के स्टाम्प घोटाले में ब्यूरोक्रेसी द्वारा दो लिपिकों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों के बचाने के प्रयास पर कड़ा रूख अपनाया है। कोर्ट ने घोटाले की विवेचना स्थानीय पुलिस के बजाय सी.ओ रैंक के अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है और विवेचना की निगरानी एस.एस.पी को सौंपी है।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि जीडीए की मूल पत्रावली तलब कर तीन हफ्ते में घोटाले में लिप्त अधिकारियों के नाम विवेचना अधिकारी को सौंप दे। कोर्ट ने याची को छूट दी है कि यदि सीओ की विवेचना से संतुष्ट न हो तो वह सीबीआई जांच के लिए अर्जी दे सकता है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को घोटाले में लिप्त अधिकारियों की सूची के साथ 23 जनवरी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टण्डन तथा न्यायमूर्ति राजीव जोशी की खण्डपीठ ने राजेन्द्र त्यागी की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता समीर शर्मा व राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एम.सी चतुर्वेेदी व जीडीए के अधिवक्ता अनूप द्विवेदी ने पक्ष रखा। कोर्ट के निर्देश पर प्रमुख सचिव आवास ने अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल किया।
बता दें कि जीडीए की आवासीय योजना के तहत शर्तों का उल्लंघन करने वालों को पुनर्बहाली की सरकार ने योजना लागू की। इस योजना की आड़ में प्राधिकरण के अधिकारियों ने पुनः आवंटन किया और सर्किल रेट से कम दाम पर स्टैम्प लिया गया। जब कि आवंटन के ही दिन आवंटी ने कई गुना अधिक दाम पर दूसरे को बैनामा कर दिया। इस प्रकार कम स्टैम्प लेकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। सरकार की तरफ से कहा गया कि बैनामा निरस्त कराने के लिए सिविल वाद दायर करेंगे। घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई के लिए प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है। सीनियर लिपिक रामचन्द्र बिन्द व जूनियर लिपिक दीपक तलवार को कमेटी की रिपोर्ट के बाद निलम्बित कर दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि शहरी योजना एवं विकास अधिनियम की धारा 41 के तहत सरकार को धोखे से आवंटन को रद्द करने का अधिकार है। वाद दायर करने की जरूरत नहीं है। सिविल वाद मियाद पर खारिज हो जायेगा। सरकार अपने पावर का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही। प्रमुख सचिव को मालूम है कि कौन अधिकारी लिप्त है। किन्तु किसी का नाम उजागर नहीं कर रहे। कोर्ट ने कहा कि जीडीए अधिकारियों ने पावर का दुरूपयोग किया है। छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर रहे हैं और बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
यमुना प्रदूषण: नगर आयुक्त से हलफनामा तलब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा वृदांवन नगर निगम के नगर आयुक्त को दो दिन में बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने नगर आयुक्त के हलफनामे को संतोषजनक नहीं माना। जिसमें यह कहा गया है कि वष्न्दावन में 11 हजार मकान हैं जो गंदा पानी का उत्सर्जन कर रहे हैं। याचिका की सुनवाई 21 दिसम्बर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टण्डन तथा न्यायमूर्ति राजीव जोशी की खण्डपीठ ने मधु मंगल शुक्ल की जनहित याचिका पर दिया है। यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त रखने की मांग में यह जनहित याचिका दाखिल की गयी है।
मेडल सप्लायर फर्म को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मेसर्स बिट्ठलदास सिंहल सर्राफ को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा ब्लैक लिस्टेड करने के 20 अक्टूबर 2014 के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आदेश देने से पहले याची को सुनवाई का मौका न देकर नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों का उल्लंघन किया गया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को नये सिरे से कार्यवाही करने की छूट दी है। विश्वविद्यालय ने याची को छात्रों को मेडल देने में गोल्ड व सिल्वर मेडल मानक के विपरीत आपूर्ति करने पर ब्लैक लिस्टेड किया था। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खण्डपीठ ने मेसर्स बिट्ठलदास सिंहल सर्राफ व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह का कहना था कि बिना सुने ब्लैक लिस्ट करना याची के सिविल अधिकारों का हनन है। विश्वविद्यालय के हलफनामे में भी स्वीकार किया है कि कार्यवाही से पहले याची को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया है। इस पर कोर्ट ने ब्लैक लिस्टेड करने के आदेश को रद्द कर दिया है।
Published on:
19 Dec 2017 09:31 pm
बड़ी खबरें
View Allप्रयागराज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
