28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस साजिश मामले में सिद्दीकी कप्पन के सह-आरोपी कैब ड्राइवर को दी जमानत

अदालत ने कहा कि कप्पन के कब्जे से कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी, ऐसी कोई भी आपत्तिजनक सामग्री आलम के कब्जे से बरामद नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस आरोपी-अपीलकर्ता का मामला सह-आरोपी सिद्दीक कप्पन के मामले से अलग है क्योंकि कप्पन के कब्जे से कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी।

2 min read
Google source verification
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस साजिश मामले में सिद्दीकी कप्पन के सह-आरोपी कैब ड्राइवर को दी जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस साजिश मामले में सिद्दीकी कप्पन के सह-आरोपी कैब ड्राइवर को दी जमानत

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस षडयंत्र मामले में सुनवाई करते हुए सह-आरोपी के कैब ड्राइवर को जमानत दे दी है। सह-आरोपी कैब ड्राइवर मोहम्मद आलम को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि उसके कब्जे से कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई थी। यूएपीए के आरोपी आलम, जिसे 5 अक्टूबर, 2020 को हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रमेश सिन्हा और ज‌स्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने जमानत दे दी। मामले में कोर्ट ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में अपीलकर्ता की संलिप्तता नहीं पाई गई।

महत्वपूर्ण रूप से कोर्ट ने उनके मामले को सिद्धिक कप्पन के सह आरोपी कैब ड्राइवर को अलग करते हुए अदालत ने कहा कि कप्पन के कब्जे से कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी, ऐसी कोई भी आपत्तिजनक सामग्री आलम के कब्जे से बरामद नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस आरोपी-अपीलकर्ता का मामला सह-आरोपी सिद्दीक कप्पन के मामले से अलग है क्योंकि कप्पन के कब्जे से कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी।

अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप कि वह दानिश नामक शख्स का रिश्तेदार है, जिसकी आपराधिक पृष्ठभूमि है और वह दिल्ली दंगों में शामिल था, अदालत ने कहा कि हालांकि वह दानिश का रिश्तेदार था, अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका कि वह आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवादी फंडिंग आदि के संबंध में उसके साथ किसी भी तरह से जुड़ा था।

यह भी पढ़ें: जानें कौन है दो लाख इनामी उमर अहमद, जिसने तीन सालों तक सीबीआइ को दिया चकमा

अदालत ने विशेष रूप से कहा कि चूंकि उसके कब्जे से केवल एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था और उस मोबाइल फोन में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली थी, इसलिए इस मामले में एनआईए बनाम जहूर अहमद शाह वटाली निर्धारित कानून लागू नहीं किया गया था। मामले में हाईकोर्ट ने कैब ड्राइवर को जमानत दे दी है।

Story Loader

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग