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संविदा पर नियुक्त कर्मी को क्षतिपूर्ति देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया यह आदेश

कोर्ट ने कहा- कानून के तहत नियुक्त कर्मचारी की गलत तरीके से बर्खास्तगी पर उसकी सेवा बहाली की जा सकती है, मगर...

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allahabad High court

इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कानून के तहत नियुक्त कर्मचारी की गलत तरीके से बर्खास्तगी पर उसकी सेवा बहाली की जा सकती है। किन्तु कम्पनी के करार के तहत नियुक्त कर्मचारी की गलत बर्खास्तगी पर उसकी पुनर्बहाली नहीं की जा सकती। वह इसके लिए मुआवजे की मांग में दावा कर सकता है। क्योंकि संविदा के उल्लंघन पर मुआवजे की मांग की जा सकती है। कोर्ट उसकी सेवा बहाली का आदेश नहीं दे सकती। इसी के साथ कोर्ट ने सेन्ट्रल उ.प्र.गैस लिमिटेड कंपनी (सी.यू.पी.जी.एल.) कानपुर नगर के बर्खास्त कर्मचारी की पुनर्बहाली की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है।


यह आदेश न्यामूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति इफाकत अली खान की खण्डपीठ ने राजेश भारद्वाज व सुभाष वर्मा की याचिकाओं पर दिया है। याचिका का अधिवक्ता प्राजंल मेहरोत्रा ने विरोध किया। याची का कहना था कि कम्पनी अनुच्छेद 12 के अन्तर्गत राज्य है। उसे बिना सुनवाई का मौका दिये सेवा से नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत याची को अनुतोष पाने का हक नहीं है। याची की सेवा संविदा पर है इसलिए वह संविदा उल्लंघन पर क्षतिपूर्ति का दावा कर सकता है।


कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 311 के विपरीत लोक सेवक की सेवा समाप्ति हो, या श्रम कानून के तहत मनमाने तरीके से बर्खास्तगी हो या नियम के विपरीत कर्मचारी को बर्खास्त किया गया हो तो ऐसे कर्मचारियों की बर्खास्तगी गलत पाये जाने पर कोर्ट उनकी सेवा में पुनर्बहाली का आदेश दे सकती है। संविदा सेवा निरस्त होने पर कोर्ट सेवा बहाली का आदेश नहीं दे सकती। कर्मी को केवल क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार है।

BY- Court Corrospondence

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