प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट: महाधिवक्ता बिल्डिंग की विजिलेंस जांच का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल के कार्यालय की बिल्डिंग में अनियमितता की विजिलेंस से जांच कराने का निर्देश दिया है।

2 min read
इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद. उच्च न्यायालय इलाहाबाद स्थित महाधिवक्ता कार्यालय भवन निर्माण में अनियमितता, फण्ड के उपयोग व सुविधाओं के अनुपयोगी होने के घपले की विजिलेंस जांच का निर्देश दिया है। कोर्ट ने महानिदेशक विजिलेंस को अपनी निगरानी में वरिष्ठ अधिकारी या टीम के जरिये जांच कर दो माह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती महानिदेशक को बिना कोर्ट की अनुमति लिए हटाया न जाय। कोर्ट ने मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव गष्ह को इस मामले में सरकार हस्तक्षेप न करे, ध्यान देने को कहा है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति शशि कान्त की खण्डपीठ ने शामली के मंशाद व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में अवैध खनन पर एडीएम राजस्व द्वारा जारी 1,04,202 रूपये की रायल्टी व पांच गुना अर्थदण्ड वसूली नोटिस की वैधता को चुनौती दी गयी थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। किन्तु याचिका जांच रिपोर्ट पर विचार के लिए दो माह बाद पेश होगी। कोर्ट ने शुरूआती दौर में याचिका पर सरकार से जवाब मांगा था।

ये भी पढ़ें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द की बिना नियमित जांच के अस्थायी कर्मचारी की बर्खास्तगी

कई बार समय दिये जाने के बावजूद जवाब न आने व सही जानकारी न देने पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव विधि को तलब कर हलफनामा मांगा। प्रमुख सचिव कोर्ट में हाजिर हुए और स्वीकार किया कि महाधिवक्ता कार्यालय की स्थिति ठीक नहीं है। लिफ्ट खराब है, भवन निर्माण भी दोषपूर्ण है, करोड़ों रूपये का जनरेटर कार्य नहीं कर रहा है। अन्य सुविधाओं की कमी है। भवन निर्माण एजेंसी ने अभी तक भवन पर औपचारिक कब्जा नहीं सौंपा है। इसलिए सरकार रखरखाव का फण्ड नहीं दे पा रही है।

कोर्ट ने कहा कि भवन निर्माण व सुविधाएं देने में भारी धनराशि खर्च की गयी है। नौ मंजिले महाधिवक्ता भवन की दो लिफ्ट में से एक खराब है। जनरेटर कभी चला ही नहीं। सुविधाओं के ठीक से काम न करने के चलते कोर्ट में सरकारी फाइलें समय से नहीं आ पा रही है। कोर्ट ने कहा कि गंभीर अनियमितता हुई है। संभव है फण्ड का सही उपयोग नहीं हुआ। फण्ड का भवन निर्माण में सही खर्च न होना गंभीर मसला है, जिसकी विजिलेंस जांच जरूरी है।
by Prasoon Pandey

ये भी पढ़ें

Video : दूषित आइसक्रीम खाने से 50 से अधिक बीमार, हरकत में आया चिकित्सा विभाग

Published on:
30 Jan 2018 10:39 pm
Also Read
View All

अगली खबर