
कोर्ट (फाइल फोटो)
Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर जिले के नजीबाबाद थाने में दर्ज एक मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह मामला शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला और राज्य सरकार से इस याचिका पर जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र और न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र की खंडपीठ ने दिया। दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं के वकील और सरकारी वकील ने कोर्ट में अपनी दलीलें रखीं। बिजनौर के नजीबाबाद पुलिस थाने में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ बीएनएस की धारा 69 (शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाना) और एससी/एसटी एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले 'विश्वज्योति चटर्जी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पीड़िता और आरोपी पिछले पांच साल से सहमति से रिश्ते में थे। दो साल से ज्यादा समय तक दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी रहे। वकील ने तर्क दिया कि पीड़िता वयस्क महिला है और उसने अपनी मर्जी से संबंध बनाए थे। इसलिए इसे शादी का झूठा वादा मानकर अपराध नहीं कहा जा सकता। इसके अलावा, आरोपी विशाल गुप्ता ने पीड़िता से शादी भी कर ली है। अब दोनों पति-पत्नी हैं।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। खंडपीठ ने कहा कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन कोर्ट की अनुमति के बिना चार्जशीट या अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सकेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता महिला से छह सप्ताह के अंदर लिखित जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी। यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां लंबे समय से सहमति वाले रिश्ते में शादी का वादा टूटने पर केस दर्ज होता है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर संबंध सहमति से थे और दोनों वयस्क थे, तो हर मामले को सीधे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
Published on:
08 Apr 2026 08:24 am
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