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नागा साधुओं के रहस्यमयी दुनिया का वह सच, जिसे नहीं जानते होंगे आप

कभी भी इन मार्गों से नहीं जाते नागा साधु

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Naga Sadhu

Naga Sadhu

इलाहाबाद. प्रयागराज में लगने वाला महाकुंभ 15 जनवरी से शुरू हो जाएगा। आस्था से जुड़े इस विशाल उत्सव में नागा साधु सबसे ज्यादा आकर्षण तथा कौतुहल केंद्र बनते हैं। लेकिन ये नागा साधु कहा कहां से आते हैं और कुंभ खत्म होते ही कहां चले जाते हैं इसे लेकर अक्सर हमारे मन में सवाल उठता है। तो आइए जानते हैं कुंभ मेले बड़ी संख्या में आने वाले इन नागा साधुओं के बारे में। कहा जाता है कि नागा साधु कभी भी आम मार्ग से नहीं जाते, बल्कि देर रात घने जंगल, आदि के रास्ते से अपनी यात्रा करते हैं।


आम-आदमी से कठिन होता है नागा साधुओं का जीवन
दीन- दुनिया से अमूमन दूर तप- साधना में लीन रहने वाले नागा साधुओं के बारे में माना जाता है कि एक आम आदमी के मुकाबले कहीं ज्यादा कठिन जीवन होता है। संतों के 13 अखाड़ों में से सिर्फ सात संयासी अखाड़े ही नागा साधु बनाते हैं। इनमें जूना, महानिर्वाणी, निरंजनी, अटल, अग्नि, आनंद और अवाहन अखाड़ा शामिल है। नागा साधुओं को दीक्षा के बाद उनकी वरीयता के आधार पर पद दिए जाते हैं। जैसे- कोतवाल, बड़ा कोतवाल, महंत, सचिव आदि। नागा साधुओं के अखाड़े से जुड़ा कोतवाल अखाड़े और नागा साधुओ के बीच सेतु का कार्य करता है। सुदूर जंगल, कंदराओं आदि में रहने वाले इन नागा साधुओं को कुंभ बुलाने का कार्य हो या फिर कोई सूचना पहुंचाने का काम, यही कोतवाल करते हैं।

आम आदमी की तरह नागा साधु भी करते हैं श्रृंगार
नागा साधु भी आम आदमी की तरह श्रृंगार करते हैं। ये सूर्योदय से पूर्व उठ जाने के बाद नित्यक्रिया और स्नान के बाद नागा साधु अपना श्रृंगार करते हैं। भभूत, रुद्राक्ष, कुंडल आदि से श्रृंगार करने वाले साधु अपने त्रिशूल, डमरू, तलवार, चिमटा, चिलम आदि साथ रखते हैं।

इन स्थानों से आते हैं नागा साधु
माना जाता है कि संयासी अखाड़ों से जुड़े अधिकांश नागा साधु आम आदमी से दूर हिमालय की चोटियां, गुफाओं, अखाड़ों के मुख्यालय और मंदिर आदि में अपनी धूनी जमाकर साधनारत रहते हैं, लेकिन ये कभी भी एक स्थान पर लम्बे समय तक नहीं टिकते हैं और पैदल भी भ्रमण करते हैं। अपने अखाड़े से जुड़े देवता की साधना और ध्यान करने वाले ये नागा साधु तमाम तरह की यौगिक क्रियाएं करते हैं। शैव परंपरा से जुड़े नागा साधु ध्यान-साधना के अलावा अपने गुरू की विशेष रूप से सेवा करते हैं।

शंकराचार्य की सेना कहे जाते हैं नागा साधु
नागा साधुओं को शंकराचार्य की सेना कहा जाता है। सनातन परम्परा के प्रतीक माने जाने वाले इन अखाड़ों और इनसे जुड़े नागा साधुओं का वैभव कुंभ और महाकुंभ में ही देखने को मिलत है।