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अब नहीं चलेगी बहानेबाजी! जरूरत पर मकान-दुकान खाली करा सकता है मालिक; हाईकोर्ट ने क्या कहा?

Important Decision Of Allahabad High Court: अपनी जरूरत पर मकान-दुकान मालिक खाली करा सकता है। रेंट अथारिटी के आदेश पर हस्तक्षेप से HC ने इनकार कर दिया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला। फाइल फोटो-पत्रिका

Important Decision Of Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यदि मकान मालिक अपनी निजी जरूरत के लिए मकान या दुकान खाली कराना चाहता है, तो उसकी जरूरत की वास्तविकता या सदाशयता की जांच नहीं की जा सकती। कोर्ट के अनुसार, मकान मालिक को केवल यह साबित करना होगा कि उसे उस संपत्ति की अपने उपयोग के लिए आवश्यकता है। चाहे वह उसी रूप में उपयोग करे या उसे गिराकर नया निर्माण करे।

किरायेदार के तर्क को नहीं मिली मान्यता

अदालत ने स्पष्ट किया कि किरायेदार यह तर्क नहीं दे सकता कि मकान मालिक के पास कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध है, इसलिए वह किरायेदारी समाप्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि यह देखना न्यायालय का काम नहीं है कि जरूरत कितनी जरूरी, कितनी अधिक या कितनी वास्तविक है। ऐसे मामलों में किरायेदार को संपत्ति खाली करनी ही होगी।

नए किराया कानून 2021 के तहत फैसला

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश उत्तर प्रदेश किराया नियंत्रण कानून 2021 के अनुरूप है और इसमें कोई अवैधानिकता नहीं है। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वाईके श्रीवास्तव (Justice YK Srivastava) ने किरायेदार की याचिका खारिज कर दी और निचली अदालतों के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

‘जरूरत की जांच’ अब कानून का हिस्सा नहीं

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नए कानून में मकान मालिक की जरूरत की ‘सदाशयता’ या ‘वास्तविकता’ की जांच का प्रावधान हटा दिया गया है। इसलिए ‘तुलनात्मक कठिनाई’ (comparative hardship) जैसे पहलुओं पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून बनाने वालों की चूक नहीं, बल्कि उनका स्पष्ट इरादा है….न्यायिक हस्तक्षेप को सीमित करना।

न्यायालय की सीमाएं भी तय

अदालत ने कहा कि न्यायालय कानून की व्याख्या के नाम पर उसमें नई बातें नहीं जोड़ सकता। जो प्रावधान कानून में नहीं हैं, उन्हें व्याख्या के जरिए शामिल नहीं किया जा सकता। अदालत का दायरा केवल यह सुनिश्चित करना है कि मकान मालिक द्वारा बताई गई जरूरत मौजूद है या नही। उसकी गहराई में जाकर जांच करना नहीं।

क्या था पूरा मामला?

मामला कानपुर नगर के गांधी नगर का है, जहां याची एक दुकान का किरायेदार था। मकान मालिक ने अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए दुकान की जरूरत बताते हुए किरायेदार को नोटिस दिया और रेंट अथॉरिटी के सामने बेदखली की अर्जी दाखिल की। किरायेदार ने तर्क दिया कि मकान मालिक के पास अन्य जगह उपलब्ध है, जहां वह अपना काम कर सकता है और दुकान खाली कराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, रेंट अथॉरिटी और अपीलीय अधिकरण ने मकान मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने भी किरायेदार की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उसे राहत देते हुए दुकान खाली करने के लिए 8 महीने का समय दिया है। साथ ही निर्देश दिया कि किरायेदार इस अवधि के भीतर संपत्ति खाली करने की अंडरटेकिंग संबंधित अथॉरिटी के समक्ष प्रस्तुत करे।