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बाहुबली छात्रनेता ने जेल से छूटने के बाद निकाला ऐसा काफिला, देखकर छूट गए बड़े-बड़ों के पसीने

प्रशासन बना रहा मूक दर्शक ,जमकर हुई नारे बाजी होता रहा स्वागत

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Student Leader Kafila

छात्रनेता का काफिला

इलाहाबाद. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता अभिषेक सिंह सोनू चार सालों बाद जेल से जमानत पर रिहा होते ही पुरे शहर में अपनी हनक दिखाने में कोई कसर नही छोड़ी। अभिषेक सिंह सोनू 2014 से हत्या के प्रयास के मामले में सलाखों के पीछे था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे सोनू पर छात्र नेता अंशु पाठक और अंश पर गोली चलाने का आरोप था। इस गोली कांड अंशु पाठक की आंख में गोली लगी थीं। साथ ही अपने प्रतिद्वंदी अभिषेक सिंह माइकल पर भी हत्या के प्रयास का मामला सोनू पर चल रहा है।

सैकड़ों गाडियों के काफिला लेकर पंहुचा शहर
अभिषेक सिंह सोनू जौनपुर जेल से रिहा होने के बाद अपने समर्थकों के साथ सैकड़ों गाड़ियों के काफिले से इलाहाबाद पंहुचा ।इस दौरान सोनू का जौनपुर से इलाहाबाद के बीच दर्जनों स्थानों पर स्वागत हुआ।अभिषेक सिंह सोनू के काफिले ने पूरे शहर को रौंद कर रख दिया और जिला प्राशासन मूक दर्शक बन क्र देखता रहा । सोनू इलाहाबाद पहुंचते ही विश्वविद्यालय के छात्र संघ भवन पर लाल पद्मधर की मूर्ति पर पहुंचे साथ ही छात्रावासों और डेलीगेसी अपने समर्थकों से मिलने पहुँचा। मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला सोनू साधारण परिवार के ताल्लुक रखता है ।सुनो के पिता बैक के रिटायर्ड अफसर है ।यह तीन भाइयो में दुसरे नम्बर पर है ।

कभी जिगरी यार थे अब खून के प्यासे
कभी एक दूसरे के जिगरी यार रहे सोनू और माइकल की सियासी महत्वाकांक्षा ने दो दोस्तों को एक दूसरे का जानी दुश्मन बना दिया। छात्रनेता अभिषेक सिंह सोनू व अभिषेक सिंह माइकल के बीच चल रही अदावत के पीछे कुछ ऐसा ही रहा। सोनू पर चार साल पहले हुए जानलेवा हमले के मामले माइकल समेत चार आरोपियों को 10,10 साल जेल व जुर्माने की सजा हो चुकी है।और कुछ दिन पहले माइकल जेल से जमानत पर बाहर आया है।इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री अभिषेक सिंह माइकल व छात्रनेता अभिषेक सिंह सोनू के बीच अदावत 2012 छात्रसंघ चुनाव को लेकर। देखते ही देखते हालात ऐसे बने की दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए।

कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा काफिले से रौंदा शहर
विवि की चुनावी रंजिश इस कदर बढ़ी की आये दिन दोनों के गुट आमने सामने भिड़ने लगे । एक के बाद एक लगातार उस दौरान हुई वारदातों में एक.दूसरे के खिलाफ मुकदमेबाजी शुरू हो गई । सोनू के ऊपर अंशु पाठक अंश और माइकल के ऊपर गोली चलाने का आरोप लगा।जिसमें अंशु पाठक के मामले में जमानत मिली है।माइकल के केस को लेकर ट्रायल शुरू नही हुआ है।अभिषेक सिंह माइकल की जमानत पर रिहा होने के बाद अब अभिषेक सिंह सोनू के भी बाहर है । छात्रावासों और विश्वविद्यालय कैंपस सहित शहर में एक बार फिर टकराव की स्थिति बन रही है । लेकिन प्रशासन का रुख मूकदर्शक वाला है। जिस तरह से माइकल के बाद सोनू ने अपने काफिले शहर को रौंद कर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए मनमानी तरीके से शहर भर में काफिले को दौड़ाया, उससे तो यह लगता है, कि आने वाले समय में अगर प्रशासन ने नहीं चेता तो दोनों की रंजीश में एक बार फिर छात्रों के गुटों और गैंग के बीच बड़ी लड़ाई को जन्म देंगे ।

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