इलाहाबाद. उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्वांचल की बड़ी हिस्सेदारी है और जब चुनावी बात हो तो बिना पूर्वांचल के बाहुबल अपराधीकरण और धनबल के पूरी नहीं होती। राजनीतिक पार्टियां भले ही दावा करें कि दागी छवि के लोगों को टिकट नहीं देंगी। लेकिन विधानसभा की स्थिति देखें या पार्टियों के घोषित प्रत्यशियों की सूची उनका दावा ढ़ेर हो जाता है। सूबे की सियासत में बाहुबल किस कदर हावी है इसका अंदाज़ा सिर्फ इससे लगा लीजिये की प्रदेश का सबसे मजबूत मुलायम सिंह यादव का कुनबा टूटने की कगार पर आ गया।