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16 साल की उम्र में सन्यासी बनें बलबीर गिरि, संभालेंगे बाघम्बरी मठ की सत्ता, क्यूँ पंच परमेश्वर का किया ज़िक्र

प्रयागराज में मंगलवार को महंत बलबीर गिरि को बाघंबरी अखाड़े के पीठाधीश्वर धार्मिक परम्पराओं के साथ बनाया गया है। पत्रिका संवाददाता सुमित यादव से खास बातचीत में उन्होने कहा कि, संतों का सम्मान और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के क्षेत्र में अपना सम्पूर्ण जीवन लगाएंगे। साथ ही महंत नरेंद्र गिरि के दिखाए हुए रास्ते पर चलकर कर्तव्यों का पालन करेंगे।

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पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरि के बाद बाघम्बरी मठ के नए उत्तराधिकारी की महंताई चादर पोषी रस्म पूरी हो गई है। आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने बाघम्बरी मठ के उत्तराधिकारी बलबीर गिरि को बना दिया है। महंत नरेंद्र गिरि की कुर्सी संभालने वाले उत्तराधिकारी बलबीर गिरि ने पत्रिका संवाददाता सुमित यादव से खास बातचीत।

महंत बलबीर गिरि ने कहा कि, महाराज नरेंद्र गिरि के दिखाए रास्ते पर चलूँगा और अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। बाघम्बरी मठ के विकास हो, इस क्षेत्र में निरंतर काम करूंगा। इसके साथ ही संतों का सम्मान और उनके हितों के लिए निरंतर अग्रसर रहूंगा।

पंच परमेश्वर के नियमों का करेंगे पालन

उत्तराधिकारी बलबीर गिरि ने कहा कि निराजनीं अखाड़े के पंच परमेश्वर के नियमों का निरंतर पालन करूँगा। कोई भी कार्य करने से पहले कार्यकारणी सदस्यों की सहमति के बाद वह कार्य किया जाएगा। महन्त नरेंद्र गिरि के आदर्शों और उनके उपदेशों पर कार्य करूँगा।

मठ के संचालन पर होगा विशेष ध्यान

महन्त बलवीर गिरि ने कहा कि जिस तरह से महन्त नरेंद्र गिरि महराज ने मठ का संचालन किया है उसी तरह यह संचालन निरंतर चलेगा। गौशालों से लेकर आश्रम पढ़ रहे छात्रों और खाने-पीने की सारी व्यवस्था उसी प्रकार से चलेगी। महराज नरेंद्र गिरि के जो कार्य अधूरा है उसे भी पूरा किया जाएगा। मठ की संपत्ति और उसे आगे बढ़ाने के लिए आगे कार्य करूँगा।

महंत नरेंद्र गिरि की कमी नहीं होगी पूरी

उत्तराधिकारी का कार्यभार संभालने के बाद बलबीर गिरि ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि की कमी कभी पूरी नहीं होगी। मेरे आत्मा में बसते हैं इसीलिए महाराज नरेंद्र गिरि के पदचिन्हों पर चलना है। मैं हर वर्ष गुरु पूर्णिमा में महाराज नरेंद्र गिरि का आशीर्वाद लेता था अब वह चित्रों में सिमट गई है।

लेटे हनुमान मंदिर का कार्यभार संभालना मुख्य भूमिका

जिस तरह महराज नरेंद्र गिरि ने लेटे हुए हनुमान मंदिर का संचालन किया है उसी तरह मंदिर का संचालन करना मेरी मुख्य भूमिका है। हर मंगलवार समय से पूजा पाठ और सजावट पर विशेष ध्यान होगा। तिथियों के हिसाब से बजरंबली भगवान का आरती करना और पुजारियों कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

16 साल की उम्र में बने संयासी

16 साल की उम्र में घर बार छोड़कर महराज नरेंद्र गिरि के चरणों में आया। महंत नरेंद्र गिरि से दीक्षा लेने के बाद सन्यास लिया। महंत नरेंद्र गिरि के निर्देशन में हर कार्य को किया है। महंत नरेंद्र गिरि ने निराजनीं अखाड़ा का महंत बनाया और हरिद्वार में भगवान शिव के मंदिर का कार्यभाल संभालता आ रहा हूँ। महराज नरेंद्र गिरि चले जाने के बाद अब उनकी जगह मुझे उत्तराधिकारी बनाया गया है। बाघम्बरी मठ का कार्यभार महारज नरेंद्र गिरि के उपदेशों पर आगे बढ़ेगा।

षोडसी पर 16 संतों को दिया दान

नवनिर्वाचित उत्तराधिकारी महंत बलबीर गिरि ने कहा कि 16 दिन पर होने वाले इस षोडसी में निराजनीं अखाड़े के 16 सन्यासियों को दान दिया गया है। इसमें महराज नरेंद्र गिरि के पसंद वस्त्र, भगवा वस्त्र, खड़ाऊ, छड़ी, घड़ी, सोने की अंगूठी, चांदी धातु और बर्तन आदि सामग्री दान दिया गया है। यह दान इसलिए दया जाता है जिससे महन्त नरेंद्र गिरि दिवंगत आत्मा की शांति मिले।

दोपहर 2 बजे से देर शाम तक चला षोडसी भंडरा

महन्त बलवीर गिरि ने बतया कि महंताई चादर पोषी के रस्म पूरे होने के बाद 2 बजे से षोडसी भंडरा शुरू हुआ। षोडसी भंडरा में 13 अखाड़ों के महन्त, आचार्य महामंडलेश्वर और संत शामिल हुए। लगभग षोडसी में कुल 15 हजार संत और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया है।

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