
प्रयागराज में सियासत और संत संवाद | Image - X/@IANS
Keshav Maurya Appeal Avimukteshwaranand: प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच बीते सात दिनों से चला आ रहा विवाद अब सियासी और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य रविवार शाम शहर पहुंचे और शंकराचार्य से सार्वजनिक रूप से विवाद समाप्त करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह समय टकराव नहीं, बल्कि संगम की धरती से शांति और सकारात्मक संदेश देने का है। डिप्टी सीएम ने संत के प्रति सम्मान जताते हुए उनके चरणों में शीश झुकाने तक की बात कही, जिससे यह साफ हुआ कि सरकार इस मसले को टकराव की बजाय संवाद के जरिए सुलझाना चाहती है।
हालांकि केशव मौर्य सर्किट हाउस से लगभग आठ किलोमीटर दूर धरने पर बैठे शंकराचार्य से मिलने नहीं पहुंचे, लेकिन मीडिया के सामने उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी भावना रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है और जैसे ही उन्हें बातचीत के लिए कहा जाएगा, वह अवश्य आगे बढ़ेंगे।
डिप्टी सीएम ने जोड़ा कि वह केवल एक राजनीतिक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि एक श्रद्धालु के रूप में भी संत से प्रार्थना कर रहे हैं कि सभी विरोधों को समाप्त कर संगम में स्नान कर देश और समाज को एक सकारात्मक संदेश दें।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दिए गए उस बयान पर भी केशव मौर्य ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें शंकराचार्य ने उन्हें समझदार बताते हुए मुख्यमंत्री बनाए जाने की इच्छा जताई थी। इस पर डिप्टी सीएम ने बेहद संतुलित रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संत हैं और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यदि वह किसी को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत भावना है और सरकार तथा पार्टी उस भावना का भी सम्मान करती है।
विवाद के बीच शनिवार रात शंकराचार्य के शिविर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कट्टर सनातनी सेना नाम के संगठन से जुड़े 8 से 10 युवक भगवा झंडे लेकर नारेबाजी करते हुए वहां पहुंचे। उन्होंने 'आई लव बुलडोजर बाबा' और 'योगी जिंदाबाद' जैसे नारे लगाए और शिविर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई और करीब 15 मिनट तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
शिविर प्रभारी के अनुसार, युवकों का नेतृत्व सचिन सिंह नामक व्यक्ति कर रहा था। आरोप है कि ये लोग लाठी-डंडे और झंडे लेकर जबरन शिविर में घुसे और मारपीट पर उतारू हो गए। शिष्यों और सेवकों ने किसी तरह स्थिति को संभालते हुए उन्हें बाहर निकाला, लेकिन हालात इतने गंभीर थे कि बड़ी घटना हो सकती थी। इसके बाद शिविर के चारों ओर रास्ते बंद कर दिए गए और थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। साथ ही शंकराचार्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
युवकों के हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके ऊपर यह आक्रमण इसलिए किया गया, क्योंकि वह गो-रक्षा की बात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बातों से कुछ राजनीतिक दल असहज महसूस कर रहे हैं और इसी कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है। संत ने साफ शब्दों में कहा कि चाहे जितना दबाव डाला जाए, वह पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, जितना उन पर अत्याचार होगा, उतनी ही मजबूती से वह अपने कदम आगे बढ़ाएंगे।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। एक ओर सरकार संवाद और शांति की अपील कर रही है, तो दूसरी ओर संत अपने मुद्दों पर अडिग नजर आ रहे हैं।
संगम की धरती पर संत और सत्ता के बीच यह टकराव केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं या यह विवाद और गहराता है।
Updated on:
25 Jan 2026, 10:51 PM IST
Published on:
25 Jan 2026, 10:51 PM IST
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