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अविमुक्तेश्वरानंद का दावा: केशव मौर्य को जानबूझकर रोका जा रहा, समझदार नेता को किया जा रहा साइडलाइन

प्रयागराज में शंकराचार्य का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सराहना करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है।

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Photo-ANI)

प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सराहना करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर केशव मौर्य स्वतंत्र होते। तो वह अब तक उन्हें संगम में स्नान करा चुके होते।

अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक, केशव मौर्य को रोका जा रहा है। एक समझदार नेता को दबाने की कोशिश हो रही है। दरअसल, रविवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य प्रयागराज पहुंचे थे। सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने शंकराचार्य विवाद पर कहा था कि जब उनसे बातचीत के लिए कहा जाएगा। तो वह जरूर बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह पूज्य शंकराचार्य से विनम्र निवेदन कर सकते हैं। उनके चरणों में सिर झुकाकर आग्रह करेंगे। कि वे संगम में स्नान कर इस विवाद को समाप्त करें।

पिछले 9 दिनों से विवाद जारी,अब सियासत हुई तेज

माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह विवाद पिछले नौ दिनों से लगातार गहराता जा रहा है। मामला कम होने के बजाय और ज्यादा उलझता दिख रहा है। रविवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा था कि चाहे उन पर कितना भी दबाव डाला जाए। वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस पूरे मामले में अब सियासत भी तेज हो गई है।

यह साबित करना कि वह शंकराचार्य, इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद नेअविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को यह साबित करने के लिए मजबूर करना कि वह शंकराचार्य है। अपने आप में बहुत बड़ा अपमान है।

18 जनवरी से शुरू हुआ विवाद, फिर नोटिस

विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई थी। उस दिन अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पैदल जाने को कहा। इस पर विरोध हुआ और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की मारपीट की स्थिति बन गई। पुलिस पालकी को खींचकर दूर ले गई। जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। इसके बाद प्रशासन की ओर से उन्हें दो नोटिस जारी किए गए। एक नोटिस में शंकराचार्य की पदवी को लेकर सवाल उठाए गए। जबकि दूसरे में मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे पर जवाब मांगा गया। चेतावनी दी गई कि उन्हें माघ मेले से प्रतिबंधित किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दे दिया है।

जितना अत्याचार होगा उतनी ही मजबूती से खड़े रहेंगे

24 जनवरी की रात एक और घटना सामने आई। जब 8 से 10 युवक नारेबाजी करते हुए उनके शिविर में घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। शिष्यों के साथ फिर धक्का-मुक्की हुई। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जितना अधिक अत्याचार होगा। उतना ही वह मजबूती से खड़े रहेंगे।

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