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बैंक में ग्राहकों के 35 लाख रूपये हड़प लिया मैनेजर, आडिट में हुआ खुलासा

जिला सहकारी बैंक में लाखों के गबन का खुलासा हुआ है। आडिट में पता चला है कि बहुआ ब्रांच के मैनेजर ने बैंक में पिछले काफी वक्त से निष्क्रिय पड़े खातों स

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फतेहपुर. जिला सहकारी बैंक में लाखों के गबन का खुलासा हुआ है। आडिट में पता चला है कि बहुआ ब्रांच के मैनेजर ने बैंक में पिछले काफी वक्त से निष्क्रिय पड़े खातों से पैसा निकाल लिया। आडिट के दौरान जब मामला खुला तो पता लगा कि ये पूरी रकम करीब 35 लाख के आस-पास की है। जिला सहकारी बैंक की बहुआ ब्रांच में मैनेजर के पद पर तैनात आनंद सिंह से बैंक में पिछले काफी वक्त से निष्क्रिय पड़े 1115 खातों में से 515 खाते में मौजूद रकम को हजम कर लिया। बता दें कि 515 खातों की केवाईसी प्रक्रिया पूरी न किये जाने के कारण इन खातों को बंद कर दिया गया था। ऐसे में बैंक मैनेजर ने बंद पड़े खातों का पैसा निकाल लिया।

 

 

 

 

 

अधिकारी ने कहा रिजर्व बैंक को जमा कराया जाने का है नियम

इस मामले के खुलासा के बाद पूरे जिले में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई। पत्रिका टीम ने जब बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से इस मसले को लेकर सवाल किया तो उन्होने ने भी इस बात को लेकर  गहरी चिंता जताई। नियम का हवाला देते हुए उन्होने कहा कि जिन खातों में पिछले काफी वक्त से पैसे का लेन-देन नहीं किया जा रहा था। उन खातों को बंद किया जाने का नियम है। उस पैसे पर किसी भी बैंक का कोई अधिकार नहीं है। बल्कि इन पैसों को रिजर्व बैंक में जमा कराया जाता है। पर प्रबंधक ने इस तरह का भ्रष्टाचार करके पूरी तरह से बैंक की विश्वसनीयता बार सवालिया निशान लगा दिया है।

 

 

 

जल्द दर्ज होगी एफआइआर 

हालांकि मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन ने भ्रष्टाचार के आरोपी मैनेजर को जांच में दोषी पाये जाने के बाद तत्काल निलंबित कर दिया। साथ ही आरोपी आनंद सिंह के खिलाफ तहरीर देकर एफआइआर दर्ज करने की मांग की है।

 

 क्या है  केवाईसी 

 केवाईसी का अर्थ है अपने ग्राहक को जाने जिसके द्वारा बैंक ग्राहकों के पहचान और पते के बारे में सूचना प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया से इस बात का पता लगाया जाता है कि कहीं कोई खाताधारक बैंक सेवा का दुरूपयोग तो नहीं  कर रहे हैं। खाता खोलते समय ही बैंकों की केवाईसी प्रक्रिया पूरा किये जाने का प्रावधान है। हालांकि कि बैंकों के लिए सरकार ने यह नियम लगाये हैं कि समय-समय पर ग्राहकों से केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करते रहें।

 

 

कौन से दस्तावेज हैं जरूरी

केवाईसी के लिए भारत सरकार ने पहचान के प्रमाण के लिए आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेजों (ओवीडी) के रूप में छह दस्तावेजों को अधिसूचित किया है। ये छह दस्तावेज हैं पासपोर्ट, ड्राईविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान कार्ड, पैन कार्ड, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा जारी आधार कार्ड और नरेगा जॉब कार्ड। इन दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज पहचान के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है। यदि इन दस्तावेजों में पते के ब्योरे भी दिए हों, तो इसे ‘पते के प्रमाण’ के रूप में भी स्वीकार किया जाएगा। यदि ग्राहक द्वारा पहचान के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत दस्तावेज में पते का ब्योरा नहीं दिया है, तो उसके एक अन्य आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा जिसमें पते का ब्योरा दिया हो। पर ऐसा न किये जाने पर बैंक को पूरा अधिकार है वह ग्राहक के खातों को बंद कर सकता है। ऐसा ही मामला फतेहर जिले मे सामने आया। जिसके बाद बैंक ने 515 खाताधारकों के खातों को बंद कर दिया। पर बड़ा खेल करते हुए आनंद सिंह ने इन खातों के पैसों को ही निकाल लिया। पर साल के आडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि 35 लाख रुपये का गबन कर दिया गया। जिसके बाद आरोपी को निलंबित कर दिया। अब प्रबंधक ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दे दी है।