
बाइक का माइलेज
इलाहाबाद. bike mileage: लगातार महंगा होता जा रहा पेट्रोल बाइक चलाने वालों के लिये परेशानी का सबब बनता जा रहा है। बाजार जाने से लेकर ड्यूटी या कारोबारी जरूरतों के चलते ज्यादातर लोग रोजाना बाइक चलाते हैं। पर अगर बाइक का माइलेज बेहतर हो तो थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है। कार्बोरेटर जेट एक ऐसा ही छोटा सा उपकरण है जिसे अपनी बाइक में फिटकर माइलेज बढ़ाया जा सकता है। दावा तो यहां तक किया जाता है कि माइलेज पहले से दोगुना हो सकता है।
how to increase bike mileage
क्या है कार्बोरेटर जेट
नाम से ऐसा लगता है जैसे यह कोई बड़ा सा डिवाइस है जिसे बाइक में लगाना पड़ता होगा। पर ऐसा नहीं है। कार्बोरेटर जेट दरअसल वाहन के फ्यूल इंजेक्ट सिस्टम में एक प्रकार का बदलाव है। आम बाइक के फ्यूल इंजेक्ट सिस्टम के कार्बोरेटर जेट में पेट्रोल के लिये एक छेद होता है, जबकि इस कार्बोरेटर जेट में तय आकार के दो छिद्र होते हैं।
bike mileage badhane ka tarika
किसने बनाया
ये कार्बोरेेटर जेट किसी बाइक बनाने वाली बड़ी कंपनी ने नहीं बनाया है। बल्कि इसे बनाने वाले एक मामूली टेक्निशियन विवेक कुमार पटेल है। विवेक कुमार पटेल उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के रहने वाले हैं। विवेक ने न ही ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की डिग्री, या डिप्लोमा लिया है और न ही इसकी कोई बाकायदा ट्रेनिंग। अपने इन्नोवेटिव माइंट और हमेशा कुछ नया ईजाद करने की ललक के चलते उन्होंने बाइक का माइलेज बढ़ाने की की जुगाड़ तकनीक निकाली। इसे उन्होंने नाम दिया कार्बोरेटर जेट।
bike mileage Kaise Badhaye
जुगाड़ को मंजूरी का इंतजार
फ्यूल इंजेक्ट सिस्टम में बदलाव कर माइलेज बढ़ाने का विवेक का दावा अपनी जगह है, लेकिन अभी फिलहाल यह एक जुगाड़ ही है। इसके लिये ऑटोमोबाइल स्पेशलिस्ट की मंजूरी जरूरी है। हालांकि जिन्हें विवेक के जुगाड़ पर भरोसा है वो बाइक में इस जुगाड़ तकनीक को लगवा भी रहे हैं। विवेक के दावे पर यकीन करें तो 400 से 500 लोगों ने अपने बाइक में इसे लगवाया है।
Bike Milage Double
बाइक माइलेज ऐसे करता है डबल
आम तौर पर बाइक 40 से 50 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे ही देती है। आजकल की बाइक में फ्यूल इंजेक्ट सिस्टम होता है। इसी से पेट्रोल इंजन तक जाता है और वेपोराइज होकर इंजन को चलाते हैं। विवेक कुमार पटेल ने इसी फ्यूल इंजेक्ट सिस्टम में थोड़ा बदलाव किया है। इनमें पहले से तजो कार्बोरेटर जेट लगे होते हैं उसके निचे के हिस्से में दो एमएम का छेद होता ह। विवेक ने इस छेद को बंद कर दिया और इसके ऊपर आधे से एक एमएम के दो छेद बना दिये। विवेक के अनुसार पहले वाले दो एमएम के छेद से पेंट्रोल बर्बाद होता है, जबकि उनकी जुगाड़ तकनीक से पूरा पेट्रोल यूज होता है, जिससे माइलेज बढ़ता है। इसमें सिर्फ 500 रुपये का खर्च आता है।
Updated on:
18 Aug 2021 02:37 pm
Published on:
18 Aug 2021 02:31 pm

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