किताबें, ब्लैक बोर्ड, स्पीकर सहित अन्य चीजें ली। उसके बाद बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया। उन्हें खुद के पैरो पर खड़ा करने के लिए राजस्थान से दियाली मंगवाई। इन्हें रंगने को दिए। अब ये भीख मांगने वाले हाथ रंगीन दियालीयों को सड़क किनारे, अपार्टमेंट सहित अन्य जगहों पर बेच कर पैसा कमा रहे हैं। दियाली रंगने वाली नन्हें लड़के व लड़कियों से जब पूछो इन पैसों का क्या करोगे तो एक ही जवाब मिलता है हम इनसे अपने भविष्य में प्रकाश फैलाएंगे। किताबे लाएंगे और पढाई करेंगे। दियाली बेचकर मिलने वाले पैसों से वो किताबें, पेन, कापी सहित अन्य सामग्री खरीदते हैं। यहां तक कि अगर पैसे बचे तो उसे घर में देकर आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। वर्तमान में करीब आधा दर्जन से ज्यादा बच्चों को अग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ने का मौका भी मिल गया है।