कभी मांगते थे भीख, आज दीया बेचकर सवार रहे अपना उज्जवल भविष्य

मलीन बस्ती के 80 बच्चों का उज्जवल हो रहा भविष्य, दीया बेच कर खरीदते हैं किताबें

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Oct 24, 2016
Child Of Malin Basti
इलाहाबाद. जो नन्हें हाथ कभी सड़कों के किनारे भीख मांगने के लिए उठते थे। आज वही हाथ ज्ञान के प्रकाश से अपने भविष्य को उज्जवल करने के लिए आतुर नजर आ रहे हैं। ये नन्हें बच्चे दियाली को खूबसूरत रंगों से रंग शहर के अलग-अलग जगहों पर बेचते हैं। मिले पैसों से पढ़ने की सामग्री के साथ मां बाप की भी मदद करते हैं।


संगम नगरी इलाहाबाद के मलिन बस्तियों में रहने वाले करीब 80 गरीब बच्चों ने अपने भविष्य को उज्जवल करने का संकल्प लिया है। भीख मांगने वाले इन नन्हें बच्चों को सकल्प दिलाने में सबसे अहम भूमिका इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों दे अदा की। ये बच्चे शहर के अलग-अलग मलीन बस्तियों में रहने वाले हैं। मलिन बस्तियों में रहने वाले 5 से 15 साल तक के करीब 500 गरीब बच्चों में से करीब 400 ने तो कभी स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी। यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सर्वे कर इन्हें पढ़ाने का बीड़ा उठाया। अब इन्हें एक छत की नीचे लाकर पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के ये छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। चार महीने के अथक प्रयास से तेजी से बच्चों को जोड़ने का काम किया। इन्होंने भीख मांगने वाले बच्चों को सही राह दिखाई। पहले खुद ही मिलकर बच्चों के लिए कार्य किया।



किताबें, ब्लैक बोर्ड, स्पीकर सहित अन्य चीजें ली। उसके बाद बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया। उन्हें खुद के पैरो पर खड़ा करने के लिए राजस्थान से दियाली मंगवाई। इन्हें रंगने को दिए। अब ये भीख मांगने वाले हाथ रंगीन दियालीयों को सड़क किनारे, अपार्टमेंट सहित अन्य जगहों पर बेच कर पैसा कमा रहे हैं। दियाली रंगने वाली नन्हें लड़के व लड़कियों से जब पूछो इन पैसों का क्या करोगे तो एक ही जवाब मिलता है हम इनसे अपने भविष्य में प्रकाश फैलाएंगे। किताबे लाएंगे और पढाई करेंगे। दियाली बेचकर मिलने वाले पैसों से वो किताबें, पेन, कापी सहित अन्य सामग्री खरीदते हैं। यहां तक कि अगर पैसे बचे तो उसे घर में देकर आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। वर्तमान में करीब आधा दर्जन से ज्यादा बच्चों को अग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ने का मौका भी मिल गया है।



लडकियां कर रही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
मलिन बस्ती में रहने वाली प्रीति, आरती, भारती व रोशनी कक्षा 10वीं की छात्रा हैं। इन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी छात्र कराते हैं। वहीं ये छात्राएं खुद पढ़ने के साथ छोटे बच्चों को भी पढ़ाती हैं। यहां बच्चों को नयोदय विद्यालय में प्रवेष कराने को लेकर भी तैयारी तेज चल रही है। कुछ लोगों ने इन्हें स्वरोजगार युक्त बनाने के लिए सिलाई मषीन उपलब्ध कराया है। जिसे वो खुद भी सीख रहे हैं।



अच्छे संस्कारों का भी पाठ
दरअसल मलिन बस्ती में ज्यादातर बच्चों के मां व बाप शराब पीकर आपस में ही लड़ने लगते हैं। इसका बच्चों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां मनोरंजनात्मक तरीके से इन्हें जागरूक किया जा रहा है। रामायण सहित अन्य मोटिवेशन फिल्मे दिखाई जा रही हैं। यही कारण है कि जो बच्चो कभी ताश के पत्ते फेंटते थे। आज वो खुद ही ताश सहित अन्य बुरी आदतों को ट्यूशन में कबूल कर छोड़ते हैं। यहां उन्हें लूडो जैसे गेम दे कर वापस भेज दिया जाता है। बच्चों के मनोरंजन के लिए अलग-अलग तरह के खेल भी आयोजित होते हैं।


Published on:
24 Oct 2016 12:44 pm
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