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प्रयागराज में कोरोना ग्राफ घटा तो नई बीमारी ने बढ़ा दी मुसीबत, जाने क्या है फोबिया

एक तरफ कोरोना संक्रमण के बढ़ोत्तरी को लेकर जिला प्रशासन में हड़कंप मचा था तो वहीं दूसरी तरह मरीजों की रिकवरी तेज होने पर राहत की खबर है। प्रयागराज में कोरोना संक्रमण रफ्तार कम हुई तो नए वायरस फोबिया की दास्तान से टेंशन बढ़ा दी है। कोरोना में हुए मौत के मंजर से आज भी वह परिवार बाहर नहीं निकल पाया है। परिवार ही सदस्य अब फोबिया नामक बीमारी से ग्रसित हो गए हैं।

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प्रयागराज में कोरोना ग्राफ घटा तो नई बीमारी ने बढ़ा दी मुसीबत, जाने क्या है फोबिया

प्रयागराज में कोरोना ग्राफ घटा तो नई बीमारी ने बढ़ा दी मुसीबत, जाने क्या है फोबिया

प्रयागराज: लगातार हो रहे कोरोना मरीजों में कमी देखी जा रही है। एक तरफ कोरोना संक्रमण के बढ़ोत्तरी को लेकर जिला प्रशासन में हड़कंप मचा था तो वहीं दूसरी तरह मरीजों की रिकवरी तेज होने पर राहत की खबर है। प्रयागराज में कोरोना संक्रमण रफ्तार कम हुई तो नए वायरस फोबिया की दास्तान से टेंशन बढ़ा दी है। कोरोना में हुए मौत के मंजर से आज भी वह परिवार बाहर नहीं निकल पाया है। परिवार ही सदस्य अब फोबिया नामक बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। इस बीमारी की वजह से लोग मानसिक अवसाद में जीना शुरू कर देते हैं।

जीवन शैली हो गई है बदल

कोरोना फोबिया एक प्रकार से मानशिक बीमारी है। जिस घर के लोग कोरोना संक्रमण की वजह से जान गवाई है उस घर के लोग आज भी उस दहशत से बाहर नहीं निकल पाए हैं। कोई इंटरनेट मीडिया पर सिर्फ कोरोना संबंधित पोस्ट देख रहा है तो कुछ लोगों के अंदर ऐसे खबरों से चिड़चिड़ापन सा आ गया है। मोतीलाल नेहरू के मनोचिकित्सक विभाग के चिकित्सक कहते हैं कि जब-जब ऐसे संक्रमण के केश बढ़ते हैं तो तब-तब ऐसे लोगों का अवसाद बढ़ जाता है। ये लोग मौत को करीब से देखने की वजह से मस्तिष्क का संतुलन बिगड़ जाता है। जिसकी वजह से एंजाइटी की समस्या बढ़ जाती है। जिसकी वजह से प्रयागराज में आठ गुना मरीज कोरोना फोबिया से ग्रसित हैं। हर रोज 20 से 25 लोग इस बीमारी से ग्रसित होकर पहुंच रहे हैं।

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मानसिक जांच है जरूरी

मानसिक अवसाद के रोगियों के मन में कोरोना को लेकर तरह-तरह के सवाल आते हैं। मन में शक अधिक हो जाता है। ऐसे के इस तरह रोगियों के अंदर से मन का बहम निकालना जरूरी होता है। उनकी एंजाइटी बढ़ी मिलती है।

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देनी पड़ती है साइको थेरेपी

मनोचिकित्सक डॉक्टर राकेश पासवान कहते हैं कि ऐसे लोग दिमाग से भी ज्यादा पॉवर का इस्तेमाल करके हद तक सोचते हैं इसीलिए उनको इस थेरेपी की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ती है। ऐसे लोगों को साइको थेरेपी से ही ठीक किया जा सकता है। अधिक दिक्कत होने एंटी डिप्रेशन और एंटी एंजाइटी दवाएं भी दी जाती है।

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