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62 वीं पुण्यतिथि 2022 : झाड़ियों में छिप गई फ़िरोज़ गांधी की पहचान, बाबा को भूल गए राहुल और प्रियंका

8 सितम्बर को स्वतंत्रता सेनानी फ़िरोज़ गांधी का पुण्यतिथि और 12 सितंबर को जन्मतिथि मनाया जाता है। लेकिन इस दिन कांग्रेस के कोई भी बड़ा नेता और न ही गांधी परिवार का कोई भी सदस्य पुष्प अर्पित के लिए नहीं पहुंचता है। मम्फोर्डगंज स्थित कब्रिस्तान में समाधि स्थल है, कब्र की हालत ठीक करने के लिए गांधी परिवार ने अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

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पुण्यतिथि: झाड़ियों में दब कर रह गई फ़िरोज़ गांधी की पहचान, बाबा को भूल गए राहुल और प्रियंका

पुण्यतिथि: झाड़ियों में दब कर रह गई फ़िरोज़ गांधी की पहचान, बाबा को भूल गए राहुल और प्रियंका

प्रयागराज: 8 सितंबर को महान आन्दोलनकारी फिरोज गांधी का पुण्यतिथि मनाया जाता है। महान स्वंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी पूर्व सांसद फ़िरोज़ गांधी के कब्र की गांधी परिवार ने अब तक सुध नहीं ली है। जिसके चलते आंदोलकारी फिरोज गांधी का कब्र बदहाली की स्थिति झेल रहा है। संगमनगरी में कई बार सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी का दौरा हुआ लेकिन चंद कदन दूर बाबा फ़िरोज़ गांधी के कब्र तक नहीं पहुंचे। कब्र की हालत देख कांग्रेसी नेता गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कांग्रेसियों की मांग है कि जिस तरह से इंद्रा गांधी, राजीव गांधी और महात्मा गांधी के समाधि स्थल बनाया गया है, उसी तरह से फिरोज गांधी के कब्र की बदहाली दूर होनी चाहिए।

20 सालों से नहीं आए गांधी परिवार का एक भी सदस्य

कांग्रेस नेता इरशाद उल्ला ने बताया कि 20 साल पहले सोनियां गांधी आईं थी, फिर उसके बाद एक बार राहुल गांधी आए हुए थे। कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद से ही प्रिंयका गांधी का कई बार संगमनगरी दौरा का हुआ लेकिन बाबा फिरोज गांधी की कब्र तक एक भी बार नहीं पहुंची। कांग्रेस नेता ने बताया कि हर वर्ष फिरोज गांधी की पुण्यतिथि और जन्मतिथि मनाई जाती है। 8 सितम्बर को स्वतंत्रता सेनानी फ़िरोज़ गांधी का पुण्यतिथि और 12 सितंबर को जन्मतिथि मनाया जाता है। लेकिन इस दिन कांग्रेस के कोई भी बड़ा नेता और न ही गांधी परिवार का कोई भी सदस्य पुष्प अर्पित के लिए नहीं पहुंचता है। मम्फोर्डगंज स्थित कब्रिस्तान में समाधि स्थल है, कब्र की हालत ठीक करने के लिए गांधी परिवार ने अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ राजनीतिक की शुरुआत

नेता इरशाद उल्ला ने बताया कि इलाहाबाद जमीन पर कांग्रेस की जमीन मजबूत करने में फिरोज गांधी बहुत बड़ी भूमिका थी। बड़े-बड़े आन्दोलन करके उन्होंने कांग्रेस का फरचम लहराया है। बड़ी दुख की बात है कि गांधी परिवार ने अपने ही घर के सदस्य से दर किनारा कर लिया है। फिरोज गांधी पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ राजनीतिक शुरुआत की थी। इसके बाद इनकी मुलाकात इंदिरागांधी से हुई थी। गांधी परिवार से रिश्ता जुड़ने के बाद फिरोज गांधी राजीनीतिक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़े थे।

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कब्र की झाड़ियों के बीच ही दब कर रह गई

मम्फोर्डगंज स्थित फिरोज गांधी की समाधि स्थल बदहाली की स्थिति झेल रहा है। कब्र के चारों ओर झाड़ियों का अंबार लगा है। कुछ कांग्रेसी नेता इनके जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर आते हैं लेकिन इसके बाद समाधि स्थल को देखने भी नही आता है। कांग्रेसी नेता का कहना है कि फिरोज गांधी की पहचान अब कब्र की झाड़ियों के बीच ही दब कर रह गई है।

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