याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विजय गौतम ने कोर्ट को बताया कि डीआईजी के खिलाफ सेक्सुअल हरासमेंट (यौन उत्पीड़न) का मामला पहले से ही जेंडर जस्टिस समिति के समक्ष लंबित है और इसकी जांच चल रही है। इस कारण दुर्भावनावश उत्तर प्रदेश से सुदूर नीमच, मध्य प्रदेश में याची का तबादला कर दिया गया है ताकि पैरवी के आभाव में आरोपों से छुटकारा मिल जाय। समूचे घटनाक्रम व आरोपों का खंडन करते हुए डीआईजी व सीआरपीएफ की तरफ से उनके वकील के.एस पवार का कहना था कि डीआईजी पर यौन उत्पीड़न का आरोप सही नहीं है। कहा गया था कि सीएमओ के खिलाफ 2004 से शिकायतें थी, इस नाते उनका मध्य प्रदेश के नीमच में तबादला किया गया है। बहरहाल, हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया याची द्वारा लगाए गए आरोपों को सही माना है तथा ट्रांसफर को दुर्भावना से युक्त मानते हुए उस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने सीआरपीएफ के कमांडेंट प्रदुम्न कुमार सिंह को भी नोटिस जारी कर उनसे इस मामले में जवाब माँगा है।