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कुम्भ क्षेत्र की परम्परा तोड़ी, यह विनाश के संकेत -खेड़ापति बालाजी, सामोद के महामंडलेश्वर से विशेष बातचीत

प्रयागराज कुंभ में गंगोली शिवाला मार्ग पर संतों संग प्रवास कर रहे खेड़ापति बालाजी, सामोद (चौमूं) के महामंडलेश्वर प्रेमदास महाराज ने खुलासा किया है कि पुराने संत कहा करते थे कि यहां गंगा किनारे सब कुछ बदल जाता है।

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प्रयागराज कुंभ में गंगोली शिवाला मार्ग पर संतों संग प्रवास कर रहे खेड़ापति बालाजी, सामोद (चौमूं) के महामंडलेश्वर प्रेमदास महाराज ने खुलासा किया है कि पुराने संत कहा करते थे कि यहां गंगा किनारे सब कुछ बदल जाता है।

कुम्भ क्षेत्र की परम्परा तोड़ी, यह विनाश के संकेत -खेड़ापति बालाजी, सामोद के महामंडलेश्वर से विशेष बातचीत

विनोद सिंह चौहान/के.आर. मुण्डियार, प्रयागराज.
जब कभी जमीन परिवर्तन होता है तो अराजकता फैलती है और विपत्ति आती है। प्रयागराज कुंभ मेला क्षेत्र की जमीन परिवर्तन का सीधा अर्थ है, बार-बार अग्निकांड होना और अराजकता फैलना। हो भी यही रहा है। अभी और घटनाएं हो सकती है।
प्रयागराज कुंभ में गंगोली शिवाला मार्ग पर संतों संग प्रवास कर रहे खेड़ापति बालाजी, सामोद (चौमूं) के महामंडलेश्वर प्रेमदास महाराज ने खुलासा किया है कि पुराने संत कहा करते थे कि यहां गंगा किनारे सब कुछ बदल जाता है। समय पाकर गंगा भी अपना रास्ता बदलती रहती है और संगम भी दूर हो जाता है। लेकिन कुंभ मेले की व्यवस्था खाक चौक की जमीन, संगम तट से लेकर काली सडक़ के बीच ही रहा करती थी। कभी बदला नहीं गया। इस बार प्रशासन ने बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अखाड़ों की हठधर्मिता के चलते किया गया है और इसमें प्रशासन भी कुछ नहीं कर सका। हमें जमीन के मामले में लगातार गुमराह किया गया। उधर, मेले का दायरा लम्बा होने से लाभ मिलने की जगह अशांति हो रही है। कई सक्टरों में बांट दिया है, जिसके चलते संत-महात्मा एक-दूसरे मिल नहीं पा रहे हैं। दूर-दूर बसा दिया है। योगी के नजदीकी संतों को संगम के समीप जमीन देने के सवाल पर महामंडलेश्वर ने कहा कि इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हम राजनीति नहीं करते हैं। हम समाज की सेवा करते हैं और इस तट पर किसी की आलोचना करना अच्छा नहीं लगता।

100 वर्ष बाद भी नहीं होगा निर्णय-
राम मंदिर हमारा विषय है और हम इसे लेकर काफी चिंतित हैं। बार-बार पार्टी राजनीति समझें या अराजकता समझें। साथ ही हर बार कोर्ट की दुहाई दी जा रही है। कोर्ट निर्णय करेगा, लेकिन इस विषय को हम डंके की चोट पर कह सकते हैं कि कोर्ट ना आज निर्णय देगा ना 100 वर्ष बाद देगा। देगा भी तो ढुलमुल नीति से देगा। यदि राम मंदिर बनेगा तो समाज के बल पर ही बनेगा। पार्टी बल पर बनेगा तो अराजकता फैलेगी। मोदीजी भी राम मंदिर को बनाने के लिए लालायित हैं, लेकिन वो भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अब तो धर्म संसद में ही तय होगा कि क्या निर्णय होगा। धर्म संसद के निर्णय के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्णय स्पष्ट होगा। उस मामले में राजस्थान के संतों के साथ हम भी शामिल रहेंगे। 1992 में कार सेवा आयोजन के दौरान हम जत्था लेकर गए थे , लेकिन उस जगह नहीं पहुंच सके और एक किलोमीटर पहले ही हम गोलियों की बौछार में पड़े रहे।