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भयंकर बाढ़ में डूब रहा है यूपी का ये जिला ,प्रशासन ने सेना और एयरफोर्स से मांगी मदद

बाढ़ कि भयावह स्थित से बढ़ी मुसीबत, लाखों परिवार प्रभावित

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Ganga Yamuna flood administration takes help of army and air force

भयंकर बाढ़ में डूब रहा है यूपी का ये जिला ,प्रशासन ने सेना और एयरफोर्स से मांगी मदद

प्रयागराज। संगम नगरी में गंगा. यमुना दोनों नदियों में आई बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है।एक बार फिर 1978 की भयावह बाढ़ जैसे हालात की आशंका बन गई है वही कमिश्नर की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार 16 लाख क्यूसेक पानी बीती रात छोड़ा गया है। जिसके गंगा और यमुना में पहुंचते ही यह स्थिति और ही भयावह होगी।हालात से निपटने के लिए अब सेना की मदद लेने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही बाढ़ में फंसे हुए हज़ारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए एयरफोर्स से हेलीकॉप्टर की मदद मांगी गई है। इतना ही नहीं एनडीआरएफ से और टीम बढ़ाए जाने की सिफारिश भी जिला प्रशासन की ओर से की गई है।

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एनडीआरएफ की टीम पिछले दो दिनों में पांच सौ से ज़्यादा लोगों को बोट के ज़रिये रेस्क्यू करके बाहर निकाल चुकी है। इसके साथ ही एक हजार से ज़्यादा लोगों ने बाढ़ राहत केंद्रों में शरण ली है। प्रयागराज में बाढ़ की वजह से पांच लाख से ज़्यादा की आबादी प्रभावित है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक तमाम मोहल्ले व गांव बाढ़ की चपेट में है। कई मोहल्ले तो पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। कई जगह तो हालात इतने खराब हैं कि लोगों के घरों की पहली मंज़िल पूरी तरह डूब गई है। तकरीबन एक लाख लोग घर बार छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।

तमाम मकान टापू बन गए हैं। सड़कें और रास्ते पानी में डूबने की वजह से कई जगहों पर लोगों का संपर्क बाकी जगहों से कट गया है। दोपहर के करीब गंगा और यमुना दोनों ही नदियां खतरे के निशान को पार गई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों के स्कूल कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। वैसे प्रयागराज के लोगों को इस भयंकर बाढ़ से फिलहाल निजात मिलती नहीं नजर आ रही है। यहां आने वाले दिनों में बाढ़ का और रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। दूसरे दिन भी शहर के कई इलाकों में बिजली व्यवस्था बहाल नही जा सकी । बाढ़ की चपेट में आये ज्यादातर इलाके की सड़कों पर नाव चल रही है ।

राजस्थान ,हरियाणा, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की नदियों व कई बैराजों से छोड़ा गया पानी दो दिनों में जब यहां पहुंचेगा तो दोनों नदियां खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर तक जा सकती हैं। बाढ़ के मद्देनजर जिले में हाई एलर्ट घोषित कर दिया गया है। प्रशासन ने सौ के करीब बाढ़ चौकियां खोली हैं। इसके साथ ही कई बाढ़ राहत केंद्र खोलकर टोलफ्री नंबर जारी किये गए हैं। हालांकि प्रशासन के इंतजाम बाढ़ पीड़ित लोगों के अनुपात बेहद कम बताई जा रही है। इसके पहले 2016, 2013, 2001 ,2000 में 1996 में गंगा यमुना खतरे के निशान से ऊपर रही हैं और प्रशासन को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा है ऐसे में एक बार फिर बाढ़ की भयावह स्थिति में लोगों को डरा दिया है वहीं दिनभर रुक-रुक कर होने वाली बरसात में लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है । पानी का जलस्तर शाम चार बजे तक फाफामऊ 84 .74 छतनाग 83.98 नैनी 84.55 मीटर है।