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कुंभ में है तो गंगा और यमुना में अर्पित करिए इस रंग का सिंदूर मिलेगा मनोवांछित फल

हर देव स्थल की तरह नदियों में भी अलग अलग रंग का चढ़ता है सिंदूर

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प्रसून पाण्डेय
प्रयागराज। संगम नगरी में धार्मिक परंपराएं , मान्यताए और आस्था हर दिन अपने नये स्वरुप में देखने को मिल रही है। त्रिवेणी की पवित्र धारा में स्नान करने के लिए दसों दिशाओं से लाखों श्रधालुओं के साथ अनेको अनेक संस्कृतियाँ उमड़ रही है। यहाँ आने वालों श्रधालुओं की आस्था उनकी पूजा का विधि विधान देखते ही बनता है। संगम स्नान के साथ गंगा ,यमुना और सरस्वती के पूजन की विधियाँ भी अलग है। संगम तट पर महिलाओं द्वारा अलग -अलग रंग का सिंदूर लगाने से लेकर नदियों में चढाने का बड़ा महत्व है ।

सभी देवियों के सिंदूर का रंग होता है अलग
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक महिलाएं अलग-अलग रंग का सिंदूर लगाती हैं । संगम तट पर बिकने वाले कई रंग के सिंदूर जो तीनों पवित्र नदियों से जुड़ी मान्यताओं से जुड़े है। जिनका पालन करने के लिए महिलाएं स्नान के दौरान नदी के अनुसार रंग का चुनाव करती है और पवित्र नदियों में सिंदूर अर्पित करती है। सामान्यतः लाल और पीले रंग का सिंदूर महिलाएं लगाती हो लेकिन इनमें मां दुर्गा महालक्ष्मी और काली तीनों देवियों के लिए अलग.अलग रंग के सिंदूर होते हैं । इनमें से मां दुर्गा को लाल रंग का सिंदूर अर्पित किया जाता है। महालक्ष्मी को पीला और काली को सिंदूरी लाल रंग का सिंदूर चढ़ाया जाता है। यह रंग महिलाएं अपनी मांग में भी धारण करती हैं ।इसी प्रकार तीनों नदियों के लिए अलग.अलग सिंदूर के अर्पण करने की मान्यता है। गंगा जी को लाल यमुना में पीला और विलुप्त सरस्वती में लाल और पीला सिंदूर मिलाकर चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से महिलाओं को आंचल सुहाग का आशीष मिलता है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

हर नदी का सिंदूर अलग
संगम तट पर सिंदूर का दुकान लगाए बैठे गीता ने बताया कि पहले इन मान्यताओं को ग्रामीण अंचल से आने वाली महिलाएं ही मानती थी। लेकिन अब इसका खुमार शहरी महिलाओं में भी चढ़ रहा है। जैसे मान्यता होती है वैसा सिंदूर नदियों में अर्पित किया जाता है । खासतौर कुंभ के मौके पर अलग.अलग रंग के सिंदूर की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि शहर की महिलाएं पहले शुभ करने भर का सिंदूर मांग में लगाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है महिलाओं में मांग भर सिंदूर लगाने का प्रचलन बड़ा है। जिसके चलते सिंदूर की बिक्री भी बड़ी है, और नदियों में चढ़ाने की परंपरा भी तेजी से फैली है। पहले की अपेक्षा इस बार संगम तट पर सिंदूर की बिक्री ज्यादा है। हम जो आते समय सिंदूर के पहली खेप को लेकर आए थे। वह पूरी तरह बिक गया है और अब हम दूसरी खेप आज सजा रहे।

हर दिन का अलग सिंदूर
कुंभ के दौरान सिंदूर की कीमत बढ़ जाती है। पीला और गुलाबी रंग का सिंदूर दो हजार का एक किलो तक बिक रहा है। जबकि लाल रंग का सिंदूर दस रुपये तोला यानी एक हजार किलो है। दुकानदार शशी कुमार ने बताया कि ये मान्यताएं हैं जो कभी खत्म नहीं होंगी जैसे -जैसे समय बदल रहा है ।लोग पुरानी मान्यताओं को फिर से मान रहे हैं ।खासतौर से पर्व और त्योहारों पर सिंदूर की डिमांड बढ़ जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नदियों में सिंदूर चढ़ाया जाता है। माना जाता है कि नदियों में सिंदूर अर्पित करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सिंदूर अलग अलग रंग के अलग अलग दिनों के हिसाब से भी चढ़ाया जाता है। इनमें सोम, गुरुवार, शनिवार को पीला सिंदूर और बाकी दिनों लाल सिंदूर लगाने की भी मान्यता है।