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पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति प्रक्रिया को चुनौती, हाईकोर्ट की अन्य खबरें

कोर्ट ने कहा है कि प्रोन्नति परिणाम याचिका की विषयवस्तु होगी ।

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allahabad High court

इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की तृतीय श्रेणी पर प्रोन्नति में विज्ञापन शर्ताें के विपरीत प्रक्रिया अपनाने के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है और याचिका को 8 जुलाई को पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रोन्नति परिणाम याचिका की विषयवस्तु होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने राजेश कुमार निगम की याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता राम सागर यादव का कहना है कि 2016 की नियमावली में तृतीय श्रेणी में प्रोेन्नति की योग्यता चतुर्थ श्रेणी की सात वर्ष की सेवा व 50 वर्ष आयु स्नातक व ओ लेबल सर्टिफिकेट निर्धारित है किन्तु ओ लेबल की कट आफ डेट तय नहीं है। इसलिए 2015 का कट आफ तय करना गलत है।

कानूनी हक पर ही हो सकता है निर्देशः हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोर्ट कानून के तहत जिसका अधिकार न हो ऐसे आदेश जारी करने की गलती नहीं कर सकती। किसी को विशेष कार्यप्रकृति के कारण विशेष वेतनमान दिया जा हा रहा है तो दूसरे समान पद पर कार्य करने वाले कर्मचरी समान वेतन की माग नहीं कर सकते। यदि किसी को उसके कानूनी अधिकार से वंचित किया जा रहा हो तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सकती है किन्तु किसी को विशेष कारणों से दिये जा रहे अधिक वेतन अन्य कर्मियों को भी देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने राजा बलवंत सिंह कालेज में सहायक सांख्यकी पद पर कार्यरत ए.के.जैन को सुपरवाइजरों के बराबर वेतन देने के न्यायाधिकरण के आदेश को रद्द कर दिया है और कालेज के प्राचार्य व भारत सरकार की याचिका स्वीकार कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाण्डिया की खण्डपीठ ने दिया है। भारत सरकार की तरफ से अधिवक्ता आर.सी.शुक्ल ने बहस की। इनका कहना था कि विपक्षी फील्ड आफिसर है और ए.के.जैन सहायक सांख्यकी पद पर है। जो वेतन विपक्षियों को मिल रहा है, वही वेतन जैन को पाने का कानूनी अधिकार नहीं है। विपक्षियों के कार्य को देखते हुए अधिक वेतन दिया जा रहा है जिसे दूसरों को नहीं दिया जा सकता।

पारिवारिक विवाद में उत्पीड़न पर रोक, 50 हजार रूपये पति को जमा करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक वैवाहिक विवाद व मारपीट धोखाधड़ी के मामले में पति व उसके परिवार के सदस्यों के उत्पीड़न पर रोक लगा दी है और विपक्षी से याचिका पर जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज नकवी तथा न्यायमूर्ति उमेश कुमार की खण्डपीठ ने दर्खसन बेगम व सात अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि पति-पत्नी के बीच समझौता हो रहा है सदाशयता दिखाने के लिए पचास हजार जमा करने को तैयार है। इस पर कोर्ट ने याची को तीन हफ्ते में मिडिएशन सेंटर हाईकोर्ट के नाम पचास हजार रूपये का बैंक ड्राफ्ट जमा करने का आदेश देते हुए कहा है कि यह राशि पत्नी को दे दी जायेगी। कोर्ट ने प्रकरण 16 जुलाई 19 को मिडिएशन सेंटर में रखे जाने को कहा है। पत्नी की तरफ से अधिवक्ता का कहना था कि कानपुर के चकेरी थाने में दहेज उत्पीड़न धोखाधड़ी व अन्य आरापों में प्राथमिकी दर्ज है किन्तु दोनों पक्ष सुलह करने पर सहमत है। कोर्ट ने याचिका को 29 अगस्त को पेश करने का आदेश देते हुए कहा है कि मिडिएशन सेंटर को नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है। दोनों पक्ष 16 जुलाई को सेंटर में हाजिर होंगे। कोर्ट ने कहा है कि पचास हजार जमा करने की रसीद दिखाने पर ही इस आदेश की प्रति जारी की जाए।

अधिक वेतन भुगतान की वसूली पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गवनर्नमेंट पीजी कॉलेज मिर्जापुर से रिटायर लाइब्रेरियन के वेतन से अधिक भुगतान की वसूली पर रोक लगा दी है। साथ ही उसकी याचिका पर यूजीसी व राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता ने वाराणसी के सुधीर नारायण उपाध्याय की याचिका पर अधिवक्ता को सुनकर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार 1996 में शासनादेश आया कि यूजीसी द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले सभी लाइब्रेरियन को यूजीसी का ग्रेड पे दिया जाए। 11 मई 2016 से इसे लागू कर दिया गया। 2009 में रिटायर याची को 24 अगस्त 2016 से नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठ वेतनमान दिया जाने लगा। 26 मार्च 2019 को 11 मई व 24 अगस्त 2016 के शासनादेश रद्द कर दिए गए और कहा गया कि यूजीसी अर्हता की तिथि से वेतनमान दिया जाएगा। इसी को लेकर गलत वेतन निर्धारण के आधार पर याची से वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।

BY- Court Corrospondence