
जवाहर यादव पंंडित
इलाहाबाद. आज से 23 साल पहले इलाहाबाद की झूंसी विधानसभा (Jhunsi Constituency) क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक रहे जवाहर यादव ‘पंडित’ (Jawahar Yadav Pandit) की हत्या के 23 साल बाद आज गुरुवार को फैसले की घड़ी है। अपने समय के सबसे बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवायी में दो दशक से भी ज्यादा का वक्त बीत गया है। जवाहर यादव हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट (Trial court) ने सुनवायी परी कर बीते 18 अक्टूबर को ही फैसला सुरक्षित रख लिया था। एडीजी कोर्ट की ओर से फैसले के लिये 31 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की गयी है। जवाहर यादव (MLA Jawahar Yadav Pandit)की पत्नी पूर्व विधायक विजमा यादव (Vijma Yadav) का कहना है कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा हैं। उन्हें न्याय जरूर मिलेगा, 23 साल तक उन्होंने न्याय के लिये लम्बी लड़ाई लड़ी है। बताते चलें कि इस हत्याकांड में जिले के बाहुबली और रसूखदार करवरिया बंधु का नाम शामिल है। हत्याकांड में पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया (Kapilmuni Karwariya), उनके भाई पूर्व विधायक उदयभान करवरिया (Udaybhan Karwariya) और पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया (Surajbhan Karwariya) के साथ ही रामचन्द्र त्रिपाठी आरोपी हैं।
कैसे हुई थी जवाहर यादव की हत्या
साल 1996 में सव्तंत्रता दिवस के दो दिन पहले 13 अगस्त को झूंसी के तब के सपा विधायक जवाहर यादव ‘पंडित’ को सरेशाम इलाहाबाद शहर के बीचो-बीच सिविल लाइंस में करीब शाम छह बजे हमलावरों ने एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग करके मार डाला था। हमलावर फायरिंग करके फरार हो गए। जब दिल का खौफ औश्र बारूद का धुआं थमा तो लोगों ने आगे बढ़कर देखा, जवाहर यादव का खून से लथपथ शव सड़क पर पड़ा था। उनके साथ ही ड्राइवर गुलाब यादव और एक राहगीर कमल कुमार दीक्षित की भी गोली लगने से मौत हो गयी थी। कहा जाता है कि यह पहली बार था जब इलाहाबाद में किसी अपराध के लिये एके-47 का इस्तेमाल किया गया था।
योगी सरकार ने वापस लिया था मुकदमा
2017 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद जब सूबे में योगी सरकार बन गयी तो करवरिया बंधुओं के लिये अच्छी खबर आयी। योगी सरकार ने करवरिया बंधुओं पर से मुकदमा वापस ले लिया था। जवाहर यादव की पत्नी विजमा यादव ने इस फैसले केा अदालत में चैलेंज किया और कानूनी लड़ाई लड़ी और अभियुक्तों को ट्रायल से गुजरना पड़ा। इस मामले में करवरिया बंधुओं की ओर से 156 गवाह पेश किये गए, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। लम्बी लड़ाई के बाद अब फैसले की घड़ी का जवाहर के परिवार को बेसब्री से इन्तेजार है।
Published on:
31 Oct 2019 10:42 am
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