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किन्नर समाज ने धूमधाम से मनाया गुरु पूर्णिमा पर्व, महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि टीना बोलीं- ‘गुरु सर्वोपरि’

किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि टीना ने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान असंभव है। गुरु ही हमें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाते हैं। आप अपने गुरु के मार्ग का अनुसरण करें और जीवन में आगे बढ़ें।

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Kinnar community celebrated Guru Purnima festival

Guru Purnima: देश समेत उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। किन्नर समाज में भी गुरु पूर्णिमा के पर्व को लेकर काफी उत्साह और उमंग नजर रहा है। इस मौके पर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि टीना ने कहा कि ''भगवान से भी ऊपर गुरु का दर्जा है। गुरु सर्वोपरि है।''

उन्होंने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा का बेहद खास अवसर है। इस मौके पर किन्नर समाज के हमारे शिष्यों ने एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। उन्होंने मेरी पूजा-अर्चना की और मेरे प्रति अपना प्रेम भाव प्रकट किया। मैं अपने सभी शिष्यों को आशीर्वाद देती हूं। सभी देशवासियों के कल्याण के लिए भी आज पूजा की गई। गुरु के बिना हम भगवान को भी नहीं पहचान सकते हैं। 'गुरु सर्वोपरि है। भगवान से भी ऊपर गुरु है।'

गुरु ही हमें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाते हैं: महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि

किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि टीना ने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान असंभव है। गुरु ही हमें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाते हैं। आप अपने गुरु के मार्ग का अनुसरण करें और जीवन में आगे बढ़ें। राष्ट्र और समाज के हित के लिए अच्छे काम करें। हमारा जीवन तभी सार्थक है जब राष्ट्र और समाज के लिए कुछ बेहतर कर सकें। इसी भाव के साथ आज हमने गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया है। मैं इस अवसर पर कामना करती हूं कि जन-जन का कल्याण हो और उनके जीवन में खूब खुशियां आएं।

कौशल्यानंद गिरि की शिष्य नैना गिरी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आज हमने अपने गुरु कौशल्यानंद गिरि की पूजा-अर्चना की। उन्हें मंच पर बैठाकर फूल मालाओं के साथ उनके प्रति अपना प्रेम और सम्मान जाहिर किया। उनके चरणों को धुलकर हमने अपना तिलक किया। हमने आज अपने गुरु के नाम पर भजन और भंडारे का भी आयोजन किया। इस खास पर्व पर हमारी गुरु ने हमें खूब आशीर्वाद दिया।

कौशल्यानंद गिरि की एक और शिष्य संजना गिरी ने कहा कि हमारे सनातन धर्म में गुरु-शिष्य की परंपरा है। सदियों से चली आ रही गुरु पूर्णिमा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमने आज अपनी गुरु की पूजा-अर्चना की।