
कुंभ मेला
प्रयागराज। कुंभ 2019 में संगम की रेती पर भारतीय संस्कृति की झलक दुनिया तंबुओं के शहर में देखेगी। कुंभ मेले में पुण्य की प्राप्ति के साथ ऐतिहासिक और मुगलिया सल्तनत की भी झलक दिखेगी। विश्व की सांस्कृतिक धरोहर को दिव्य और भव्य बनाने के लिए सरकार हजारों करोड़ रुपए का बजट खर्च कर रही है, जिसके माध्यम से वैश्विक जगत में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप छोड़ी जा सके। संगम की रेती पर लगने वाला आस्था धर्म और संस्कृति का विशाल मेला कई मायने में बेहद खास होने जा रहा है।
कुंभ मेले को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जिसके तहत कई काम पहली बार मेले में हों रहे।योगी सरकार ने फैसला किया है कि संगम की रेती पर संस्कृति ग्राम बसाया जाएगा। सांस्कृतिक ग्राम में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक काल तक की मानव सभ्यता संस्कृति के विकास के क्रम को संजोया जाएगा। देश की धार्मिक और पौराणिक सभ्यता को दुनिया संगम के तट पर देख सकेगी। देश के सभी राज्यों की सांस्कृतिक झलक और संस्कृति का दर्शन मिलेगा।
रामराज्य की परिकल्पना की झलक
मोदी और योगी सरकार रामराज्य की परिकल्पना से विश्व समुदाय को जोड़ने का प्रयास संगम तट पर करेगी। कुंभ मेले के दौरान पर्यटन विभाग की ओर से बसाए जाने वाले संस्कृति ग्राम पर योगी सरकार 7 करोड़ रुपए खर्च करेगी। त्रिवेणी की धरती पर लगभग 8 एकड़ में सांस्कृतिक ग्राम में समग्र भारत को बसाने दिखाने और बनाने की तैयारी जल्द शुरू होगी। पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार संस्कृति ग्राम में पुरापाषाण काल से लेकर हड़प्पा मोहनजोदड़ो बेलन घाटी, मांडो गांव की धरोहर को डिजिटल तरीके से दिखाया जाएगा।
मानव सभ्यता के विकास को दर्शाया जायेगा
संस्कृति समग्र ग्राम में अलग-अलग राज्यों की झांकियां होंगी। सभी राज्यों के अपने अपने चित्र होंगे। मानव सभ्यता के विकास के क्रम की यात्रा के पड़ाव को भी दर्शाया जाएगा। इसमें बेलन घाटी, राजस्थान की बनास घाटी, मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी और तमिलनाडु की कोतर्लपार घाटी की आरंभिक सभ्यता को भी स्थान दिया गया। साथ ही भीमबैठका की गुफा और चित्रकारी के प्राचीन साक्ष्यों के अलावा मिर्जापुर में मिले पुरापाषाण काल के औजार मध्य पाषाण काल की सभ्यता को भी इस संस्कृति समग्र में प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, प्रतापगढ़ के सहाय नाहर राय में मिले युद्ध के साक्ष्यों के अलावा हड्डी के आभूषणों को भी इस मेले में दुनिया देख सकेगी।
मुगल संस्कृति की भी झलक मिलेगी
अंतरजी खेड़ा एटा में मिले लोहे के पहले साक्ष्य के अलावा आरंभिक कृषि पशुपालन के विकास के क्रम को भी दर्शाया जाएगा। कुंभ मेले में पुण्य की डुबकी लगाने वाले दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति सभ्यता के हर पहलू को दिखाने की कोशिश योगी सरकार की योजना में शामिल है।संगम की रेती पर मुगल संस्कृति की भी झलक मिलेगी। मुगल शासकों के अलावा स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों भारतीय राजनीतिक कला संगीत से जुड़ी महान हस्तियों के चित्र भी संस्कृति के ग्राम में लोगों को आकर्षित करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों का चयन
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनूप श्रीवास्तव ने बताया की संस्कृति ग्राम बसाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों का चयन किया जा रहा है। म्यूरल डिजिटलाइजेशन के अलावा अलग-अलग स्थानों के नामी चित्रकारों को आमंत्रित किया जा रहा है। संगम की रेती पर दिव्य संस्कृति ग्राम की झलक मिलेगी।
Published on:
24 Nov 2018 10:51 pm
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