
सबसे पहले ये जानते हैं कि यह क्यों मनाई जाती है? इस दिवस को मनाने के पीछे का क्या कारण है? ‘मौनी’ यानी मौन रहना। माना जाता है कि इस दिन पर मौन रहकर ईश्वर की साधना की जाती है, इसलिए इसे 'मौनी अमावस्या' कहते हैं। दूसरी मान्यता यह भी है कि इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था और मनु शब्द की वजह से ही इस दिन को 'मौनी अमावस्या' का नाम दिया गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'मौनी अमावस्या' के दिन गंगा में स्नान करने से पाप मिटते हैं और ग्रह दोष भी शांत होते हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रयागराज में 'मौनी अमावस्या' के दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम पर देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए संगम में नहाने से लोगों को कष्ट और पापों से मुक्ति मिलती है।
मौनी अमावस्या में नहान का मुहूर्त
अब आपको 'मौनी अमावस्या' के मुहूर्त के बारे में बताते हैं। ज्योतिषों की मानें तो 21 जनवरी को सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 52 मिनट के बीच स्नान और दान-धर्म से जुड़े काम करने का शुभ मुहूर्त रहेगा।
'मौनी अमावस्या' के दिन स्नान के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचने के लिए कम्बल, गुड़ और तिल का दान कर सकते हैं। इस बार 'मौनी अमावस्या' शनिवार को है, इसलिए यह शनैश्चरी अमावस्या भी है।
Updated on:
21 Jan 2023 08:23 am
Published on:
21 Jan 2023 08:00 am

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