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तो क्या ताउम्र जेल में रहेगा अतीक अहमद? उम्रकैद को लेकर क्या कहता है कानून

Atiq Ahmad: हाल ही में उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य अपराधी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। बहुत सारे लोगों को उम्रकैद सजा को लेकर कन्फ्यूजन है। आइए जानते हैं कानून।

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Atiq Ahmad Life imprisonment

अतीक अहमद

उमेश पाल हत्याकांड मामले में माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज के एमपी अमल कोर्ट ने सश्रम की सजा सुनाई है और यदि ऊपरी अदालत से सजा कायम रहा तो उसे उम्र भर जेल में ही रहना होगा। आप बता दें कि सश्रम उम्रकैद की सजा के तहत अतीक को उम्र भर जेल में ही रहना होगा और साथ ही काम भी करना होगा। और हां, 14 साल सजा काटने के बाद राज्य सरकार उसके आचरण को देखते हुए विचार कर सकती है कि उसे रिहाई देनी है या नहीं। जी हां, राज्य सरकार के पास ऐसी शक्ति होती है की वह एक निश्चित मापदंड के आधार पर किसी भी अपराधी की सजा कम कर सकती है। तो आइए जानते हैं कि आखिर यह उम्रकैद की सजा का मतलब क्या है? कितने साल जेल मे गुजारना होता है अपराधी को?

आजीवन कारावास का मतलब
हाईकोर्ट के वकील के अनुसार आजीवन कारावास या उम्रकैद की सजा सिर्फ गंभीर अपराधों के लिए ही दी जाती है। सामान्य तौर पर लोगों को आजीवन कारावास को लेकर बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है। कई लोगों को यह लगता है कि आजीवन कारावास सिर्फ 14 से 20 साल का ही होता है। लेकिन यह एक गलतफहमी है, उम्रकैद का मतलब होता है कि सजा पाने वाला अपराधी अपने बचे हुए जीवनकाल को जेल में व्यतीत करेगा। जब भी कोई कोर्ट किसी अपराधी को आजीवन कारावास या उम्रकैद की सजा सुनाती है तो इसका सीधा मतलब यही होता है कि अपराधी को अपनी अंतिम सांस तक जेल के चारदीवारी में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई फैसलों में इसका जिक्र किया है।

आजीवन कारावास को लेकर है लोगों में कन्फ्यूजन
लेकिन कई बार देखा गया है कि आजीवन कारावास मिलने के बावजूद अपराधी को उसके 14 से 20 साल की सजा काटने के बाद रिहा कर दिया जाता है। यही वजह है की लोग अब भी आजीवन कारावास को लेकर कन्फ्यूजन में रहते हैं। आपको बता दें कि राज्य सरकार के पास एक ऐसी शक्ति होती है की वह किसी भी अपराधी की सजा को एक निश्चित मापदंड के आधार पर कम कर सकती है। राज्य सरकार अपराधी के आचरण को देखते हुए अपराधी के 14 साल सजा काटने के बाद यह विचार कर सकती है कि उसे रिहा करना है या नहीं। आईपीसी की धारा 55 और 57 में सरकारों को अपराधी की सजा कम करने का अधिकार है।

धारा 53 में है कुल 5 तरह का दंड
आईपीसी की धारा 53 में दंड के प्रकारों का उल्लेख है। धारा 53 में कुल 5 तरह के दंड का उल्लेख किया गया है जिसमें पहला मृत्युदंड, दूसरा आजीवन कारावास, तीसरा कारावास (सश्रम और सादा कारावास), चौथा संपत्ति का समपहरण और पांचवा जुर्माना। यदि किसी अपराधी को आजीवन कारावास मिलती है तो इसका मतलब है कि उसे अपने बचे हुए जीवनकाल को जेल में ही बिताना होगा।

सरकार के पास है विशेषाधिकार
आजीवन कारावास होने पर सरकार के पास ऐसी शक्ति है कि वह किसी अपराधी के सजा को कम कर सकती है। CRPC की धारा 433 के तहत सरकार को किसी भी अपराधी की सजा को कम करने का अधिकार है। सरकार अपराधी के 14 साल सजा काटने के बाद उसके आचरण को देखते हुए सजा कम कर सकती है।