27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस मंदिर में शेषनाग के विराट स्वरूप के होते है दर्शन ,औरंगजेब भी देखकर हो गया था बेहोश

-नागपंचमी पर पूजा करने से मिलती है कालसर्प दोष से मुक्ति -औरंगजेब अपनी सेना लेकर लौट गया

3 min read
Google source verification
naag vasuki

naag panchami

प्रयागराज । सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के अवसर पर संगम नगरी के नाग वासुकी मंदिर में भक्तों का ताता लगा रहा । मान्यता है कि नाग पंचमी पर नागवासुकी मंदिर में दर्शन पूजन करने से कालसर्प दोष की बाधा से मुक्ति मिलती है। नाग बासुकी मंदिर में दर्शन करने से मनोवांछित फल मिलते हैं। नाग वासुकी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब औरंगजेब ने भारत में मंदिरों को तोडना शुरू किया तो नाग वासुकी मंदिर इतना चर्चित हुआ कि वह खुद से देखने और तोड़ने पहुंचा था । लेकिन नागवासुकी के भयंकर स्वरूप को देखकर औरंगजेब अपनी विशाल सेना के साथ वापस लौट गया।

शेषनाग का विराट स्वरूप
नाग वासुकी मंदिर में शेषनाग और नाग वासुकी की मूर्तियां है, शेषनाग अपने विराट स्वरूप के साथ यहां स्थापित है । सावन माह में यहां हर दिन यहाँ बड़ी संख्या में पूजा.अर्चना करने पहुंचते हैं ।यह मंदिर बेहद आकर्षक और अद्भुत है क्योंकि यहां नाग बासुकी के भव्य स्वरूप का दर्शन होता हैं। नागवासुकी मंदिर की पौराणिक मान्यता है की श्रावण मास में इस मंदिर में पूजा.अर्चना करने से कालसर्प दोष की शांति होती है नाग वासुकी मंदिर में शेषनाग और नाग वासुकी की मूर्तियां स्थापित है वैसे तो वर्ष भर नाग वासुकी मंदिर में पूजा.अर्चना चलती है लेकिन श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ होती है।

यह भी पढ़ें-#patrikaUPnews इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बड़ी पहल , कैम्पस में स्थापित होगा मॉडल करियर सेंटर

औरंगजेब विशाल सेना के साथ पंहुचा था
मंदिर के पुजारी राजेन्द्र मिश्र बताते हैं कि जब आता ताई औरंगजेब पूरे भारत में हिंदू धर्म स्थलों को तोड़ रहा था । उस समय औरंगजेब की विशाल सेना ने प्रयाग के नाग वासुकी मंदिर को भी तोड़ने का प्रयास किया था । लेकिन जब इस में मुगल सैनिक कामयाब नहीं हुए तो इसकी जानकारी मुगल शासक औरंगजेब तक पहुंचाई गई । जिसके बाद खुद औरंगजेब प्रयाग के नाग वासुकी मंदिर को तोड़ने के लिए चढ़ाई की । पुजारी बताते हैं कि औरंगजेब गंगा तट की ओर से मंदिर में पहुंचा और जैसे यह अपनी तलवार को निकालकर नाग वासुकी की मूर्ति पर वार करने चला तो वैसे ही नागवासुकी का दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ उनके विशाल स्वरूप को देखकर औरंगजेब गिरकर बेहोश हो गया था।

भगवान विष्णु कहा प्रयाग जाइये
पद्मपुराण के पाताल खंड और श्रीमद्भागवत में नाग बासुकी और इस मंदिर का विस्तृत उल्लेख मिलता है । पुजारी ने बताया कि कथा के अनुसार समुद्र मंथन में देवताओं और असुरों ने नाग वासुक सुमेरु पर्वत में लपेटकर उनका प्रयोग रस्से की तरह किया था । मंथन के चलते नाग वासुकी के शरीर में काफी रगड़ हुई थी और जब मंथन सब समाप्त हुआ तो उनका शरीर जलने लगा । नागवासुकी चल नहीं पा रहे थे जलन को दूर करने के लिए वासुकी मंदराचल पर्वत चले गए । लेकिन उनके शरीर की जलन समाप्त नहीं हुई । तब नाग बासुकी ने भगवान विष्णु से अपनी पीड़ा के बारे में बताया और उनसे अपने दर्द का उपाय पूछा भगवान विष्णु ने नाग वासुकी को बताया कि वह प्रयाग चले जाए वहां सरस्वती नदी का अमृत जल का पान करें और वही विश्राम करें उससे उनकी सारी पीड़ा समाप्त हो जाएगी।

गर्भगृह में नाग और नागिन की स्पष्टधारी मूर्ति
नाग वासुकी मंदिर के गर्भगृह में नाग और नागिन की स्पष्टधारी मूर्ति विराजमान है ।जिसे नागवासुकी का रूप माना जाता है और उनकी पूजा होती है ।मान्यता है कि परम पिता ब्रह्मा के मानस पुत्रों ने यहाँ नाग वासुकी कीमूर्ति के रूप में स्थापित किया था । यहां मौजूद पत्थर 10 वीं सदी से भी प्राचीन बताए जाते हैं । मंदिर परिसर में गणेश पार्वती भीष्म पितामह की शैया पर लेटी हुई प्रतिमा भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है । मंदिर के पुजारी के मुताबिक इस मंदिर का सैकड़ों वर्ष पहले नागपुर के राजा श्रीधर भोसले ने बनवाया था ।

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग