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प्रयागराज के एस आर एन अस्पताल में राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान की नई पहल

स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (SRN) में राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत नई पहल शुरू की गई है। इस अभियान की शुरुआत प्रोफेसर एवं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. खुर्शीद परवीन के मार्गदर्शन में की गई है।

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राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस का उद्देश्य लोगों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सभी पात्र व्यक्तियों को समय पर आवश्यक टीके उपलब्ध कराना है। इस दिन स्वास्थ्य संगठनों और सरकारी संस्थानों द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। माता-पिता को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाता है कि उनके बच्चों को सभी आवश्यक टीके समय पर मिलें।
स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (SRN) में राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत नई पहल शुरू की गई है। इस अभियान की शुरुआत प्रोफेसर एवं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. खुर्शीद परवीन के मार्गदर्शन में की गई है।

अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए डॉ.अभिषेक तिवारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके तहत चिल्ड्रेन अस्पताल और SRN अस्पताल के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया, जिससे वे टीकाकरण प्रक्रिया को सही ढंग से लागू कर सकें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मेरे विभाग में मेरे मार्गदर्शन में किया गया, जहां टीकाकरण प्रक्रिया, डेटा एंट्री और मरीजों की देखभाल संबंधी निर्देश दिए गए।

इस अभियान की पूरी जिम्मेदारी कम्युनिटी मेडिसिन विभाग विभाग को सौंपी गई है, जो सरकार द्वारा बनाए गए U-WIN पोर्टल के माध्यम से सभी टीकाकरण प्रविष्टियाँ दर्ज कर रहा है। यह पोर्टल कोविड-19 टीकाकरण पोर्टल की तर्ज पर विकसित किया गया है, जिससे डेटा रिकॉर्डिंग और निगरानी को सरल बनाया जा सके। इस पहल के तहत, SRN अस्पताल, चिल्ड्रेन अस्पताल और पीपी सेंटर में प्रतिदिन टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनकी प्रविष्टि U-WIN पोर्टल पर की जाएगी।

इस मौके पर डॉ. खुर्शीद परवीन ने कहा, "टीकाकरण केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी की सुरक्षा का संकल्प है। SRN अस्पताल और चिल्ड्रेन अस्पताल में इस अभियान को सफल बनाने के लिए सामुदायिक चिकित्सा विभाग पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। U-WIN पोर्टल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र व्यक्ति टीकाकरण से वंचित न रहे। इस पहल से शहर में संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।"

भारत में 1995 में "पल्स पोलियो अभियान" की शुरुआत की गई थी, जिसके अंतर्गत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई। इस पहल की सफलता के परिणामस्वरूप, भारत को 2014 में पोलियो मुक्त देश घोषित किया गया। इसके बाद कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिली। टीकाकरण एक सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया है, जो टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, हेपेटाइटिस-बी, टिटनेस, खसरा, रूबेला और पोलियो जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक है।