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जन्मदिन विशेष: शादी के नौ दिन बाद पति की हुई थी हत्या, बाहुबली अतीक अहमद के भाई को हराकर बनीं थी विधायक

-कभी पिता की पंचर की दूकान थी -अस्पताल में मरीज की देख भाल के दौरान हुआ प्यार -बाहुबली अतीक के सामराज्य को हिलाया  

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atik

प्रयागराज।बाहुबली अतीक अहमद जब सियासत से लेकर जरायम की दुनिया के शिखर पर थे ।कोई भी उनकी तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं करता था।उस वक्त उनके जरायम के तिलिस्म में सेंध लगाने वाली सामान्य सी महिला जो कभी अस्पतालों में पोछा लगाती थी तो कभी सड़क के किनारे पंचर की दुकान पर पिता को खाना पहुंचाने जाती थी। वह महिला जो कभी बीच सड़क पर चलने की हिम्मत नहीं कर सकती थी। उसने सूबे के सबसे ताकतवर बाहुबली नेता को ठिकाने लगाने में बढ़ा अहम रोल अदा किया।

दस साल रही विधायक
हम बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी की नेता और पूर्व बसपा विधायक पूजा पाल की पूजा पाल की । जो कभी इलाहाबाद शहर पश्चिमी से बसपा की विधायक हुआ करती थी । पूजा पाल कभी दूसरों के अस्पतालों घरों और दफ्तरों में झाड़ू पोछा करती थी । लेकिन अब वह पूजा पाल एक बड़ी राजनेता और समाजवादी पार्टी की स्टार प्रचारक बन गई है ।10 साल तक विधानसभा में रहने वाली पूजा पाल को उनके पति राजू पाल की हत्याकांड के बाद मायावती ने प्रयागराज आ कर अपना उम्मीदवार घोषित किया था । हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद पूजा पाल को अनुशासनहीनता के आरोप में मायावती ने बाहर का रास्ता दिखाया । तो वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्नाव से पूजा पाल को अपना उम्मीदवार बनाया । हालाकि पूजा पाल चुनाव नहीं लड़ पाई लेकिन सपा की स्टार प्रचारक होकर प्रदेश भर में समाजवादी पार्टी के लिए वोट मांगा।

अस्पताल में प्यार हुआ
कम पढ़ी.लिखी पूजा पाल छोटी उम्र में ही पिता और परिवार जिम्मेदारियों को संभालने के लिए काम करने लगी। अस्पताल में घर में दफ्तर में झाड़ू पोछे के लिए जाने लगी । कुछ सालों बाद शहर के एक इलाके में चलने वाले निजी अस्पताल में काम मिल गया वहां काम सीखा और नौकरी करने लगी । उसी दौरान पूजा पाल की राजूपाल से मुलाकात हुई । जानकरी के अनुसार राजू पाल को गोली लगी थी वह उसी निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे । इलाज के दौरान राजू पाल की तीमारदारी की जिम्मेदारी पूजा पाल पर थी और तीमारदार प्यार में बदल गई और फिर दोनों ने शादी कर ली।

अतीक के खौफ के बीच राजू पाल जीत दर्ज की
साल 2004 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से फूलपुर की सीट पर शहर पश्चिमी के बाहुबली विधायक अतीक अहमद को अपना उम्मीदवार बनाया।फूलपुर सीट से अतीक अहमद चुनाव जीतने में कामयाब रहे सांसद बनने के बाद उन्होंने विधायक इस्तीफा दिया।अपनी जगह अपने छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ को सपा से टिकट दिला दिया। जून 2004 में शहर पश्चिमी के विधानसभा में उपचुनाव हुए बीएसपी ने राजू पाल को अपना उम्मीदवार बनाया ।टिकट पाने से पहले राजू पाल का नाम किसी ने नहीं सुना था ।लेकिनतकदीर ने राजू पाल का साथ दिया और वह अतीक अहमद के खौफ के बीच से बहुजन समाज पार्टी की झोली में सीट डाल दी। चुनाव जीतने के बाद यह तय हो गया कि चुनाव की हार बाहुबली अतीक अहमद ऐसे ही नहीं स्वीकार कर लेंगे।

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शादी के नौ दिन बाद बीच रोड पर मारा डाला
विधायक बनने के बाद राजू पाल और पूजा पाल दोनों के घरवालों ने एक दूसरे के रिश्ते को स्वीकार कर लिया था। विधायक बनने के 7 महीने बाद राज्यपाल ने 16 जनवरी 2005 को एक मंदिर में पूजा के साथ शादी कर ली । लेकिन यह साथ दोनों की किस्मत में नहीं था। शादी के केवल 9 दिन बाद 25 जनवरी को पोस्टमार्टम हाउस से निकल कर अपने घर जा रहे विधायक राजू पाल को घेरकर ताबडतोड फायरिंग की गई राजू पाल की मौके पर मौत हो गई। सनसनीखेज हत्याकांड के बाद इलाहाबाद कई दिनों तक हिंसा की चपेट में रहा। शहर जल उठा लोगों में दहशत थी इस मामले में अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पर आरोप लगा और दोनों को इस मामले में जेल जाना पड़ा।

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दो चुनावों में लगातार मिली अतीक को हार
राजू पाल की हत्या के बाद एक बार फिर 2005 में शहर पश्चिमी में उपचुनाव हुआ इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने तमाम बवाल और दंगे के बाद अतीक अहमद पर भरोसा जताया अशरफ को मैदान में उतारा। जबकि मायावती ने राजू पाल की विधवा पूजा पाल को इलाहाबाद आकर टिकट दिया अपना उम्मीदवार बनाया। हालांकि बाहुबली अतीक अहमद के खौफ के सामने मतदाता घरों से नहीं निकले और एक बार फिर यह सीट अशरफ के पाले में गई। लेकिन 2007 में बीएसपी ने सीट पर एक बार फिर राजू पाल के विधवा पूजा पाल को अपना उम्मीदवार बनाया और इस चुनाव में मायावती की लहर थी और पूजा पाल ने अतीक के भाई अशरफ को चुनाव हराया 2012 के चुनाव में उन्होंने फिर अतीक अहमद के भाई को मात दी। 2017 के चुनाव में फिर बसपा से पूजा पाल उम्मीदवार हुई हालांकि इस चुनाव में पूजा पाल को तीसरे नंबर पर जाना पड़ा। बाहुबली अतीक अहमद अपनी परंपरागत सीट छोड़कर कानपुर गए आखिर में सपा नेतृत्व ने वहां से भी अतीक अहमद का टिकट काटकर उन्हें किनारे किया।

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