26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

माध्यमिक स्कूलों में आउट सोर्सिंग से चपरासी रखने के नियम को चुनौती, सुनवाई जारी

मामले की सुनवाई बुधवार को भी होगी

2 min read
Google source verification
allahabad high court

allahabad high court

इलाहाबाद. माध्यमिक विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउट सोर्सिंग के जरिए भर्ती करने के प्रदेश सरकार के नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी है। सरकार ने इंटरमीडिएट एजूकेशन एक्ट के विनियम 101 में संशोधन कर चतुर्थ श्रेणी पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति आउट सोर्सिंग से करने का निर्णय लिया है।

याचिका कर्ताओं का कहना है कि चतुर्थ श्रेणी के हजारों पद माध्यमिक स्कूलों में रिक्त हैं। यह ऐसा पद है तो सृजित है और अस्थायी नहीं है। ऐसे में स्थायी पदों पर आउट सोर्सिंग से कर्मचारी रखने की सरकार की नीति गलत एवं मनमानापूर्ण है। आज याचिका पर चीफ जस्टिस डी बी भोसले एवं जस्टिस एम के गुप्ता की पीठ में सुनवाई प्रारंभ हुई। प्रदेश सरकार की विशेष अपील पर अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि आउट सोर्सिंग से भर्ती करने का सरकार का यह निर्णय कानून के तहत उनकी अधिकारिता में है। मामले पर बुधवार को भी सुनवाई होगी।

बार चुनाव में पात्रता बदलने से बदले समीकरण

इलाहाबाद. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बाईलाॅज 17 में पदों पर चुनाव लड़ने की अर्हता को लेकर वकीलों में बेचैनी बढ़ती जा रही हैं। अभी तक बार काउंसिल में पंजीकरण तिथि से अनुभव माना जाता था और बाद में बार की सदस्यता लेने वाले भी चुनावी समर में उतर जाते थे। हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन की सदस्यता तिथि से वकालत अनुभव को चुनाव लड़ने की अर्हता घोषित कर दी। तभी से महीनों से चुनाव प्रचार करने वाले कई संभावित उम्मीदवार पद पर चुनाव लड़ने के योग्य ही नहीं रह गए हैं। बार के बाईलाॅज के अनुसार अध्यक्ष एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए 20 वर्ष, महासचिव के लिए 15 वर्ष, उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष के लिए 10 वर्ष, संयुक्त सचिव के लिए 5 वर्ष तथा कार्यकारिणी सदस्य के लिए 03 साल की सदस्यता अनिवार्य है।

बार की सदस्यता अवधि पूरी करने वाले ही इन पदों पर चुनाव लड़ सकेंगे। कई संभावित पदाधिकारी ऐसे हैं, जो वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर चुनाव मैदान में उतरने वाले थे, किन्तु बीस साल की सदस्यता होने एवं बार काउंसिल में पंजीकरण को न मानने की वजह से चुनाव मैदान से बाहर होना पड़ा है। कुछ प्रत्याशी दुःखी हैं तो कुछ इस नियम से खुश हैं कि प्रतिद्वंदियों की संख्या में कमी आयी है। फिलहाल 25 नवम्बर को मतदाता सूची जारी होने के बाद संभावित प्रत्याशियों की रूपरेखा स्पष्ट हो सकेगी।

बड़ी खबरें

View All

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग