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यूपी के इस संग्रहालय में देख सकेंगे शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की पिस्तौल

अंग्रेज अफसर सांडर्स की हत्या में इस्तेमाल हुई थी यह सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल

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bhagat singh

इलाहाबाद: संगम नगरी में जल्द ही शहीद ए आज़म सरदार भगत सिंह की पिस्तौल म्यूजियम में आम लोगों को देखने को मिल सकती है।जिसके लिए संस्कृति मंत्रालय को पत्र लिखकर इलाहाबाद संग्रहालय के अधिकारियों ने पिस्तौल के हस्तांतरण की मांग की है। गौरतलब है कि अभी तक इलाहाबाद संग्रहालय में शहीद चंद्रशेखर आजाद की पिस्तौल को लोग देख सकते हैं। लेकिन अब आजाद ए भगत सिंह सहित अन्य क्रांतिकारियों से जुड़े दस्तावेज को संग्रहित करने की कवायद शुरू हो गई है।

दरअसल कुंभ से पहले संगम नगरी में पर्यटन के मद्दे नजर तमाम तैयारियां चल रही है। जिसमें संग्रहालय पर्यटकों के आने का प्रमुख स्थान होगा। इसी के तहत संग्रहालय में आजादी की कहानियों से युवाओ को रूबरु कराने के लिए आजादी के नायकों कि एक अलग गैलरी बनाने की कवायद शुरू हुई है। इसमें चंदशेखर आजाद,भगत सिंह ,राजगुरु, सुखदेव सहित अन्य क्रांतिकारियों और आजादी के नायको की सुरक्षित वस्तुओं को संग्रहित करने की योजना है।

बता दें कि शहीद ए आजम भगत सिंह की ऐतिहासिक पिस्तौल अभी तक पंजाब के हुसैनीवाला बॉर्डर स्थित बीएसएफ म्यूजियम में रखी गई है। इलाहाबाद म्यूजियम में पहले से ही चन्द्रशेखर आजाद की पिस्तौल लोग देख सकते है। संग्रहालय के अधिकारियों के अनुसार मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद कुंभ के दरमियान देश विदेश के लोग सरदार भगत सिंह की पिस्तौल को इलाहाबाद म्यूजियम में देख सकेंगे। यह पिस्टल देश की आजादी के पहले लाहौर हाईकोर्ट के आदेश पर बीएसएफ के प्रशिक्षण केन्द्र के संग्रहालय में मौजूद है।

बता दें कि भगत सिंह पर आरोप था। कि उन्होंने अंग्रेज अफसर सांडर्स की हत्या की थी जिसमे अमेरिकन 32 बोर की कौलट सैमी ऑटोमेटिक पिस्टल से की थी। जिसका नंबर 168896 बताया गया था। शहीद ए आजम भगत सिंह को फांसी दिए जाने के बाद 1931 में लाहौर हाईकोर्ट ने उनकी पिस्तौल को पंजाब के फिल्लौर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में भेजने का निर्देश दिया था। हांलाकि निर्देश के 13 साल बाद 1944 में यह पिस्तौल फिल्लौर पहुंची थी। जहाँ आज भी बड़ी तादात में लोग देखने जाते है। और अब इसे इलाहाबाद के संग्रहालय में लाने की तैयारी है।

केन्द्र सरकार की पर्यटन योजना के तहत कुम्भ में आने वाले पर्यटकों को चन्द्र शेखर आजाद के शहादत स्थल से रूबरू कराने के साथ ही आजदी के नायको की कहानी से जोड़ने की तैयारी है। देश की आजादी में दिए गए उनके योगदान को उनकी कुर्बानी को दुनिया भर में पंहुचाने के लिए एक अलग वीथिका बनाने की तैयारी कर रही है। जिसमें चन्द्र शेखर आजाद के साथ ही उनके समकालीन दूसरे क्रांतिकारियों सुखदेव और राजगुरु से जुड़ी व्यक्तिगत वस्तुओं को भी लोगों के लिए रखे जाने की तैयारी की जा रही है। म्यूजिम प्रशासन का मानना है कि इससे कुम्भ में आने वाले पर्यटकों को देश के इन महान क्रान्तिकारियों की वीरगाथा से रुबरु होने का अच्छा अवसर मिलेगा। साथ ही लोगों को अपने देश की आजादी से जुड़ी जानकारियां भी मिलेंगी।