
Bigest Ram statue is not easy to construct in Saryu river in Ayodhya
इलाहाबाद रामजन्म भूमि के मुद्दे को लेकर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी इलाहाबाद पहुंचे, और नरेंद्र गिरी महाराज से मुलाकात की। महंत नरेद्र गिरी से लंबी चर्चा के बाद वह मीडिया से मुखातिब हुए।वसीम रिजवी के सामने कई सवालात थे। जो खुद उनकी पैरोकारी से लेकर और उन पर लग रहे तमाम आरोपों के थे।संगम नगरी पंहुचे, वसीम रिजवी ने साफ कहा की हम राष्ट्रहित के लिये मसले का हल चाहते है। साथ ही यह भी साफ़ किया की जिस मस्जिद को लेकर विवाद चल रहा है।उस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई हक नहीं है।उन्होंने बताया की 1944 में सुन्नी वक्फ बोर्ड का निर्माण हुआ। जिसके बाद में सर्वोच्च न्यायालय से उनका रजिस्ट्रेशन खारिज हुआ। वही उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का नाम मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद रखा। बता दें की मीर बाकी बाबर के सेनापति थे।जो शिया मुसलमान थे। सुन्नी बक्फ बोर्ड के लोग जबरन इसे सुन्नी बक्फ बोर्ड में इसे दर्ज करा लिये जिसके बाद फसाद शुरू हुआ।जो पूरी तरह से गलत साबित हो चूका है।उन्होंने कहा की अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा।अगर मुस्लिम समुदाय यह चाहेगा कि मस्जिद भी बने तो फैजाबाद या अयोध्या के बाहर एक जगह पर तय हो जाए। जहां मस्जिद का निर्माण हो क्योंकि हिंदू धर्म के लोगों को देशभर में बन रही लाखों मस्जिदों पर कोई आपत्ति नहीं है।इसलिए उसके बाहर कही भी बनने वाली मस्जिद पर कोई आपत्ति नहीं होगी।
कब्रों की जमीन बेचने वाले कहते है खुद को पाक साफ
वसीम रिजवी ने कहा कि 70 सालों में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने केवल इस मसले पर विवाद पैदा किया है। रिजवी के अनुसार कुछ लोगों ने इस मामले को अपने फायेदे के लिये इतना उलझा दिया की हालत यहाँ तक आ पहुचें। और उन्होंने कहा की मुझ पर जो आरोप लगा रहे है।उन आरोपों को लागने वाले वो है।जिनकी दूकान इस मुद्दे पर बंद होने जा रही है। और जो लोग खुद को पाक साफ़ बता रहे है। वो कब्रों की जमीन तक को लाखो रूपये बेच रहे है। उन्होंने साफ किया यह उनका या सिया समुदाय का सिर्फ एक ही मकसद है की राम जन्म भूमि पर मंदिर का ही निर्माण हो। उन्होंने ने कहा की पहले इस मसले पर खून खराबा हो चूका है।अब इस मुद्दे को सुलझाना होगा। इस मामले को शांति पूर्ण ढंग से निपटाने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने जो समय तय किया है।उसके पहले क़ानूनी जामा पहना कर समझौता नामाँ कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा। वासिम रिजवी के अनुसार इस मसले पर अखाडा परिषद सहित कई हिन्दू धर्माचार्यो से बात हो चुकी है।जो अब अपने आखिरी पड़ाव पर है।
हाथ में खंजर लेकर वार्ता नही होगी
वही वसीम रिजवी ने सुन्नी बख्फ़ बोर्ड के पक्षकार बनने के मुद्दे को खारिज किया।कहा की अगर शांति पूर्ण वार्ता चाहते है तो उनका स्वागत है। लेकिन किसी फसाद के लिये उन्हें इस मुद्दे पर बोलने का कोई हक नही।उन्होंने कहा की उनका उस हर जगह स्वागत है जहाँ समझौते की बात पर उनकी सहमती है। लेकिन खंजर छुपा कर बैठने वालो से किसी भी तरह की वार्ता नही होगी और ना ही उनका हक़ है ।आज वो लोग इस मुद्दे पर कूद रहे है। जो पिछले सत्तर सालो से सिर्फ नफ़रत की ही बात की है। उन्होंने श्री श्री रवि शंकर से मुलाक़ात की जिक्र करते हुए कहा की मै उनसे मिला और बताया की सही दिशा में बात को आगे बढाये। सिया बक्फ बोर्ड हिन्दू समाज के साथ है। उन्होंने कहा की बाबरी की शहीदी के जिम्मेदार कुछ हठधर्मी मुल्ला है।जिनके कारण मस्जिद शहीद हुई थी। और एक बार फिर ऐसे ही कुछ लोग अपनी दुकान चलाने के लिये आज मुद्दे को सुलझने नही देना चाहते है ।
1853 में इस मुद्दे पर पहली बार हुआ बवाल
बता दें की सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसंबर राम जन्मभूमि बनाम बाबरी ढांचा की सुनावायी शुरू होनी है।लगातार सुनवाई की अर्जी को स्वीकार करते हुए।सुप्रीम कोर्ट ने एक बार आपसी सहमती से इस मामले को दोनों समुदायों के मुद्दई सहित धार्मिक जानकारों को सुलझाने की सलाह दी है। बता दें कि 1853 में मंदिर तोड़ने और मस्जिद बनाने को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में पहली बार हिंसा हुई थी। जिसके बाद अंग्रेजी हुकूमत में दोनों समुदायों में अंदर के हिस्से और बाहर के हिस्से में पूजा और नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी थी। उसके सालों बाद तक 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का अभियान शुरू किया। जो 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से लेकर 1991 में कल्याण सिंह की सरकार में मंदिर के लिए भूमि अपने अधिकार में लेना और 6 दिसंबर 1992 में हजारों कारसेवक अयोध्या पहुंचकर बाबरी के विवादित ढाचे को गिरा दिया।जिसकी पैरोकारी अभी तक जारी है और मामला सर्वोच्च न्यायलय में विचाराधीन है।
Published on:
13 Nov 2017 04:09 pm
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