
सर्द रातों में सिसकियां लेता इस विक्षिप्त मां का दर्द, ये स्टोरी आपकी रूह को भी रूला देगी !
विनोद सिंह चौहान, प्रयागराज.
अगर ईश्वर कहीं पर है तो उसे देखा कहां किसने, धरा पर तो तू ही ईश्वर का रूप है मां। यह शब्द उस मानसिक विक्षिप्त मां को समर्पित हैं, जो हाडक़ंपाने वाली सर्दी में भी ममता की छांव में नन्हीं परी को सडक़ पर लिए बैठी है। लेकिन, देश के सबसे बड़े मेले में इस मां और उसकी परी की सुरक्षा को लेकर पूरा अमला अनजान बना हुआ है। क्या विक्षिप्त होना ही मां के लिए बड़ा कारण बन गया, जो अपनी बेटी के साथ खुले में सर्द रातें गुजारने पर मजबूर हो रही है।
बात हो रही है, प्रयागराज कुंभ की ओर जाने वाली लाल सडक़ की। जहां एक रात मैंने एक मां को नन्हीं बेटी के साथ सडक़ पर खुले में रात गुजारते देखा। यह दृश्य देख आंखें भर आई। पिछले पांच दिनों से मैं भी उस मार्ग से गुजर रहा हूं, जहां से दिनभर में सैकड़ों बड़े वाहन निकलते हैं और उन्हीं वाहनों के शोर में मां अपनी बेटी को सीने से लिपटाए बैठी रहती है। हर बार जहन में एक ही सवाल उठता है कि सुरक्षा के नाम पर कुंभ में कई सौ करोड़ लगाया जा रहा है, लेकिन कोई उस मां की पीड़ा को नहीं समझ सका, जो मानसिक विक्षिप्त है। कहा जाए तो विक्षिप्त मां और नन्हीं परी दुनिया से बे-खबर हैं। ऐसे में प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा जा सके।
बड़ी बात तो यह है कि जिस लाल सडक़ पर मां-बेटी रातें गुजार रही हैं, उससे चंद कदमों की दूरी पर कोतवाली का अग्निशमन केन्द्र और कोतवाली थाना भी है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी उस मां-बेटी को देखता तो हैं, लेकिन उस मुख्य मार्ग से आज तक किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया गया है। ऐसे हालातों में लगता है कि उस मां और परी का अब अल्लाह ही निगेहबां है।
Published on:
22 Jan 2019 06:50 pm
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