
Terror training in madrassa: यूपी के प्रयागराज में हाल ही में एक ऐसा मदरसा मिला, जहां नकली भारतीय नोटों की परफेक्ट कॉपी छापी जाती थी। संगम नगरी के अतरसुइया इलाके में जामिया हबीबिया नाम के इस मदरसे को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिससे सभी हैरान हैं। ये मदरसा केवल नकली नोट की तैयार नहीं कर रहा था, बल्कि इस मदरसे में नफरती नागरिक भी तैयार हो रहे थे। इस मदरसे के बच्चों में सांप्रदायिक हिंसा के बीज बोए जा रहे थे।
मदरसे में ये बताया जा रहा था कि RSS एक आतंकी संगठन है इसलिए उनके लोगों को टारगेट कैसे करना है। इस मदरसे में कुछ ऐसे भड़काऊ साहित्य मिले हैं, जिसके जरिए यहां के बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा था, ताकि वो आगे चलकर, आतंक का सिपाही बन सकें।
मौलाना देता था तालीम
Terror training in madrassa: मदरसे का मौलाना मोहम्मद तफसीरुल मदरसे के बच्चों को बताता था कि RSS के लोगों पर अटैक कैसे करना है। ये मौलाना मदरसे के बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहा था। मदरसे से जब नकली नोटों का जखीरा और नोट छापने की मशीनें मिलीं, तो इस मदरसे की देश विरोधी गतिविधियों का पता चला। सुरक्षा एजेंसियों ने जांच आगे बढ़ाई तो मामला और ज्यादा गंभीर हो गया। जांच एजेंसियों को मदरसे से कई अहम दस्तावेज़ मिले हैं। ये मदरसा समाज में नफरती माहौल बनाने का ट्रेनिंग सेंटर भी था।
जांच एजेंसियों को मदरसे के मौलाना मोहम्मद तफसीरुल के कमरे से उर्दू में लिखी कुछ भड़काऊ साहित्य मिला है. उर्दू भाषा की एक किताब में RSS को देश का सबसे बड़ा आतंकी संगठन बताया गया है. देश में होने वाली आतंकी घटनाओं का भी इन साहित्यों में जिक्र किया गया है।
मदरसे के मौलाना के कमरे से स्पीड पोस्ट की कुछ पर्चियां भी मिली हैं। इन पर्चियों के आधार पर पते वैरिफाई किए जा रहे हैं। पूछताछ भी लगातार जारी है। RSS पर लिखी गई जो भड़काऊ साहित्य मिला है, उसके लेखक हैं एसएम मुशर्रफ महाराष्ट्र पुलिस में पूर्व पुलिस महानिरीक्षक हैं।
महाराष्ट्र हमले के बाद लिखी गई थी किताब
इसी तरह से उनकी एक किताब है Who killed karkare- The real face of terrorism in india… इस किताब में एस एम मुशर्रफ ने मुंबई के 26/11 हमले को 'हिंदू अटैक' बताया था। उन्होंने इस हमले के पीछे हिंदुओं की साजिश बताया था। इसी वजह से पाकिस्तानी अखबारों ने उनकी काफी तारीफ की थी, क्योंकि मुंबई अटैक को पाकिस्तान की साजिश नहीं माना था। एस एम मुशर्रफ ने अपनी किताबो के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की थी। यही वजह है कि उनकी किताबें नफरती सेंटर्स पर बच्चों के ब्रेनवॉश के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
Updated on:
05 Sept 2024 07:59 am
Published on:
05 Sept 2024 07:04 am
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