
अगर आप ने लिया है लोन, पैसा चुकाने पर बैंक नहीं कर सकता है मनमानी, ये है आप के पास महत्वपूर्ण अधिकार
प्रयागराज: लोन लेने के कई प्रकार होता है और आप कई तरह के लोन ले लेते हैं। कोई पर्सनल लोन लेता है तो कोई होम लेता है। अगर कोई व्यक्ति घर बनवाने या खरीदने के लिए होम लोन या फिर पर्सनल लोन लेता है और आर्थिक तंगी या किसी काराण के चलते अपनी लोन की क़िस्त अर्थात ईएमआई नहीं चुका पाता है, बैंक उसे डिफाल्टर मान लेता है। अब आप को ऐसे में क्या करना होगा यह हम इस रिपोर्ट में बताने जा रहे हैं।
ये हैं महत्वपूर्ण अधिकार
अगर आप मे लोन लिया है तो किसी माह का ईएमआई रुक जाने से बैंक आप को कॉल करके या फिर रिकवरी एजेंट से दबाव बनाता है। लेकिन आप अच्छे से जान लीजिये कि लोन का कर्ज नहीं चुकाने पर कोई भी बैंक आपको धमका नहीं सकता है। कोई भी लोन रिकवरी एजेंट आपसे जोर जबर्दस्ती नहीं कर सकता, ना ही आपका किसी भी तरह से अपमान कर सकता है। हाँ बैंक अपने पैसे वापस लेने के लिए रिकवरी एजेंटों की सेवाएं ले सकता है। परन्तु ये अपनी मनमानी नहीं कर सकते।
यदि कोई ग्राहक लोन लेने के बाद बैंक के पैसे नहीं चुका पा रहा है, तो इस स्थिति में बैंक प्राइवेट एजेंट हायर जरूर कर सकता है, जिसे थर्ड पार्टी एजेंट कहा जाता हैं। लेकिन ये एजेंट किसी भी हालत में आपको या ग्राहक को धमका नहीं सकते। ये एजेंट ना ही ग्राहक का अपमान कर सकते है। कानून (Law) उन्हें ये अधिकार कतई नहीं देता है। अब यदि कोई बैंक अपने पैसे वसूली के लिए किसी एजेंट को अपने Customar के पास भेजता भी है, तो वो किसी भी टाइम उग्राहक के घर नहीं जा सकते है। नियम के मुताबिक़ एक समय निर्धारित किया गया है। यह समय सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच का है।
यदि कोई एजेंट रात में या सुबह सुबह आ जाता है, तो यह नियम विरुद्ध है। एजेंट घर पर कोई भी अपमानजनक नात नहीं कर सकता है। यदि ऐसा कोई करता भी है, तो ग्राहक इस घटना की शिकायत बैंक में कर सकता है और अगर बैंक की भी मिली भगत है व बैंक में कोई आपकी नहीं रहा है, तो इस स्थिति में भी ग्राहक बैंकिंग ओंबड्समैन की मदत ले सकता है। यहाँ आपकी सुनवाई जरूर होगी।
बैंकों को पूरे नियम का पालन करते हुए अपनी बकाया राशि को वसूलने के लिए आपकी गिरवी राखी चीज़ या प्रॉपर्टी पर कब्जा करने से पहले आपको लोन चुकाने का समय देना होता है और बनता होता है की इसके क्या निकसान हो सकते हैं। इस तरह के मामले में कर्ज देने वाले को डिफॉल्टर को 60 दिन का नोटिस जारी करना पड़ता है। ग्राहक को पर्याप्त समय लिखित में दिया जाता है की वह अपनी समस्या सुलझा ले और पैसो का भी अरेंजमेंट कर ले। बैंक में कुछ केस में आपको क़िस्त में कुछ छूट भी हासिल होती है। कुछ मामलों में आपके लोन को माफ़ भी किया जाता है। जिसकी पूरी सरकारी और क़ानूनी प्रक्रिया होती है।
Published on:
20 Mar 2022 10:04 pm
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