
पुणे के AIT ने सीधे सेकंड ईयर में दिया एडमिशन
AIT Pune direct admission BTech: कहावत है कि अगर हौसलों में जान हो, तो बंद रास्ते भी नई मंजिलों का पता देने लगते हैं। पुणे की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 21 साल के पूर्व कैडेट अकिरेड्डी साई वेदांश की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है। पिछले साल रूटीन ट्रेनिंग के दौरान गर्दन में लगी गंभीर चोट (सर्वाइकल वर्टिब्रा फ्रैक्चर) के कारण वेदांश का भारतीय वायुसेना (IAF) में पायलट बनने का सपना अचानक टूट गया था और उन्हें मेडिकल आधार पर अकादमी से बाहर होना पड़ा था।
लेकिन, देश में अपनी तरह की पहली पहल के तहत पुणे के प्रतिष्ठित आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (AIT) ने इस होनहार कैडेट की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। संस्थान ने वेदांश को अपने बीटेक (BTech) प्रोग्राम के दूसरे वर्ष में सीधे प्रवेश (डायरेक्ट एडमिशन) देकर उनके करियर को एक नई शुरुआत दी है।
सेना की पृष्ठभूमि से आने वाले वेदांश के पिता एक सैन्य अधिकारी हैं। बचपन से ही फौज के माहौल में पले-बढ़े वेदांश का एक ही सपना था- आसमान छूना। उन्होंने साल 2024 में एनडीए (NDA) में प्रवेश पाया था और वहां वे एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक कर रहे थे। तभी पिछले साल मार्च में एक नियमित ट्रेनिंग सेशन के दौरान उनके साथ एक बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में उनकी गर्दन की हड्डी फ्रैक्चर हो गई। हालांकि, उन्हें किसी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन उन्हें एक विशेष 'फिलाडेल्फिया कॉलर' (नेक ब्रेस) पहनना पड़ा, जिसने उनकी गर्दन की हलचल को पूरी तरह सीमित कर दिया। इस गंभीर चोट के कारण वे सैन्य प्रशिक्षण की कठिन परिस्थितियों के लिए अनफिट हो गए और उन्हें अकादमी छोड़नी पड़ी।
कठिन समय में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के दिशानिर्देशों और विभिन्न सैन्य संस्थानों से मंजूरी मिलने के बाद, आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी के तहत संचालित होने वाले AIT ने वेदांश को 'ओवर एंड अबोव' (विशेष परिस्थितियों वाली सीटों) प्रावधान के तहत सीधे द्वितीय वर्ष में दाखिला दिया। AIT पुणे के निदेशक, मेजर जनरल (रिटायर्ड) उदय शंकर सेनगुप्ता ने बताया कि संस्थान के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली अनूठी पहल है।
उन्होंने गर्व से कहा कि 'AIT सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान होने से कहीं बढ़कर है- यह एक ऐसा समुदाय है जो करुणा और दृढ़ संकल्प को महत्व देता है। गंभीर चोट और लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बावजूद वेदांश ने दूसरे सेमेस्टर की सभी शैक्षणिक आवश्यकताओं को शानदार ढंग से पूरा किया। AIT को न केवल एक टॉपर छात्र मिला, बल्कि उनका एडमिशन और सफलतापूर्वक एक साल पूरा करना हमारे संस्थान के लिए भी गर्व का मील का पत्थर है।'
हादसे के एक साल बाद, अब वेदांश की गर्दन से ब्रेस हट चुका है और वे तेजी से रिकवर कर रहे हैं। 21 साल के वेदांश ने इस बड़े झटके को अपने भविष्य पर हावी नहीं होने दिया। एक बार फिर अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए तैयार वेदांश ने कहा कि 'मैं अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद कर रहा हूं, ताकि डायरेक्ट एंट्री के जरिए दोबारा देश सेवा और सेना में जाने के अपने सपने को पूरा कर सकूं।'
Updated on:
10 Jul 2026 03:53 pm
Published on:
10 Jul 2026 03:53 pm
