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18 से 25 साल की लड़कियों को टारगेट, ज्यादा वेतन और लग्जरी लाइफ का लालच, मलेशिया के एक शख्स का भी लिंक

TCS Nashik Case: नासिक के टीसीएस (TCS) दफ्तर में धर्मांतरण का मामला अब एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा कर रहा है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट के तार मलेशिया तक जुड़े हुए हैं, जहां इमरान नाम के एक शख्स की संदिग्ध भूमिका पाई गई है। आरोपियों का मुख्य निशाना कम उम्र की लड़कियां और आर्थिक रूप से कमजोर युवतियां थीं, जिन्हें लालच और दबाव के जरिए इस्लाम धर्म अपनाने पर मजबूर किया जा रहा था।

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पुणे

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Pooja Gite

Apr 16, 2026

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TCS विवाद की कड़ियां अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ होने की बात सामने आ रही हैं। photo AI

TCS News Update: नासिक स्थित TCS के बीपीओ परिसर में चल रहे एक बड़े धर्मांतरण और उत्पीड़न रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसकी कड़ियां अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जुड़े होने की बात सामने आ रही हैं। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने फरवरी में मिली गुप्त सूचना के आधार पर एक 'अंडरकवर ऑपरेशन' चलाया, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर दफ्तर के भीतर तैनात किया गया था। इस पूरी साजिश में एचआर मैनेजर निदा खान की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो विरोध करने वाले कर्मचारियों को सहानुभूति के जाल में फंसाकर उन्हें अपनी जीवनशैली और पहनावा बदलने के लिए मजबूर करती थी।

अंतरराष्ट्रीय लिंक होने का दावा

विशेष जांच दल SIT को जांच के दौरान ऐसे वॉट्सऐप चैट और डिजिटल सबूत मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि यह दफ्तर के भीतर से संचालित एक वैश्विक नेटवर्क था जिसे मलेशिया से निर्देश मिल रहे थे। इमरान नाम का एक व्यक्ति, जिसका कथित तौर पर मलेशिया से संबंध है, WhatsApp बातचीत में सामने आया है। अब बैंक खातों की अब गहनता से जांच की जा रही है ताकि विदेशी फंडिंग के दावों की पुष्टि की जा सके। एक स्पीकर और पीड़ितों के बयानों से भी इस केस के अंतरराष्ट्रीय लिंक के तार मिले हैं।

अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज

विशेष जांच दल SIT की तफ्तीश में अब तक इस मामले से जुड़े 12 कर्मचारियों की पहचान 'टारगेट' के रूप में हुई है, जबकि पीड़ितों की बढ़ती संख्या के बीच कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। आठ महिलाओं और एक पुरुष की दर्ज कराई गई इन शिकायतों में यौन उत्पीड़न, शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने और धर्मांतरण के लिए मानसिक दबाव बनाने जैसे बेहद संगीन आरोप शामिल हैं, जिससे इस पूरे कॉर्पोरेट स्कैंडल की भयावहता और अधिक स्पष्ट हो गई है।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस रैकेट का लक्ष्य 18 से 25 वर्ष की कम उम्र की महिला कर्मचारी थीं। दर्ज FIR के अनुसार, आरोपी कर्मचारियों ने न केवल अपनी सहकर्मियों के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि उन पर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए भारी दबाव भी बनाया। यह पूरा घटनाक्रम साल 2022 से शुरू होकर लगभग दो-तीन साल तक दफ्तर के भीतर चलता रहा। 9 कर्मचारियों के अलावा, तीन और लोग भी इस रैकेट से प्रभावित हुए हैं और उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं। हालाकि, सामाजिक बदनामी और निजी चिंताओं का हवाला देते हुए, उन्होंने अभी तक औपचारिक शिकायतें दर्ज नहीं की हैं।

पुलिस के अनुसार, अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें उच्च पदों पर आसीन टीम लीडर और इंजीनियर शामिल हैं। वहीं, इस पूरे सिंडिकेट की मुख्य कड़ी मानी जा रही HR मैनेजर निदा खान अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जांचकर्ता उसकी भर्ती प्रक्रियाओं और संगठन के भीतर उसकी भूमिका की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

विदेशी नौकरियों, ज्यादा वेतन और लग्जरी लाइफ का लालच

नासिक पुलिस को मिली एक गुप्त सूचना के बाद, टीसीएस (TCS) परिसर के भीतर चार महिला कांस्टेबलों को 'हाउसकीपिंग स्टाफ' बनाकर तैनात किया गया। इन महिला जासूसों ने सफाई कर्मचारी बनकर दफ्तर के हर कोने की निगरानी की, कर्मचारियों के आपसी मेलजोल को समझा और पीड़ितों के लगाए गए आरोपों की जमीनी हकीकत जानी। उनकी यह रिपोर्ट इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने में सबसे अहम साबित हुई है।

इस जांच में अब मलेशिया से जुड़े 'इमरान' नाम के एक व्यक्ति का जिक्र सामने आया है। पुलिस को मिली व्हाट्सएप चैट्स से संकेत मिले हैं कि इमरान एक कट्टरपंथी उपदेशक हो सकता है। वह वीडियो कॉल के जरिए महिला कर्मचारियों से जुड़ता था और उन्हें विदेशी नौकरियों, भारी-भरकम वेतन और लग्जरी लाइफस्टाइल का लालच देकर ब्रेनवॉश करता था। जांच एजेंसियां अब इस 'डिजिटल उपदेशक' की असली पहचान और इस पूरे सिंडिकेट में उसकी सटीक भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

जांच के दौरान SIT ने ऐसे कई वॉट्सऐप ग्रुप्स का भंडाफोड़ किया है, जिनमें आरोपी कर्मचारी सक्रिय थे। इन ग्रुप्स का इस्तेमाल किसी पेशेवर काम के लिए नहीं, बल्कि सहकर्मियों की निगरानी और 'संभावित लक्ष्यों' की पहचान करने के लिए किया जाता था। यहां आरोपियों के बीच सुनियोजित रणनीतियां तय होती थीं कि किसे और कैसे जाल में फंसाना है। साक्ष्यों को मिटाने के लिए कई चैट्स डिलीट कर दी गई थीं, जिन्हें अब फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से रिकवर किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि ये डिजिटल रिकॉर्ड्स आरोपियों के असली इरादों और इस संगठित सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने में सबसे ठोस सबूत साबित होंगे।

एचआर मैनेजर निदा खान फरार, अन्य की भी तलाश

HR मैनेजर निदा खान अभी भी फरार है, जबकि जांचकर्ता कंपनी के अंदर उसके भर्ती पैटर्न और भूमिका की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने TCS से आंतरिक जांच-पड़ताल और भर्ती से जुड़े फैसलों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। महाराष्ट्र के मंत्री और BJP नेता गिरीश महाजन ने आरोप लगाया कि कंपनी के चार-पांच मुस्लिम कर्मचारियों और कुछ अधिकारियों ने लड़कियों को नौकरी और आकर्षक वेतन का लालच देकर फंसाया। दावा किया कि उन पर नमाज पढ़ने और रोजा रखने का भी दबाव डाला गया।

सूत्रों के अनुसार, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी आरोपियों के नाम सामने आ सकते हैं। जांचकर्ताओं को शक है कि यह नेटवर्क, जितना शुरू में सोचा गया था, उससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। इसके जवाब में, TCS ने कहा कि वह 'जीरो-टॉलरेंस' (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) की सख्त नीति का पालन करता है, और इस बात की पुष्टि की कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है, उन्हें निलंबित कर दिया गया है।